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Hamirpur (Himachal) News: बायोमीट्रिक मशीनें लगाने के लिए जल्द हो बजट का प्रावधान

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हमीरपुर। प्रदेश उच्च न्यायालय ने निर्देशानुसार सभी शिक्षण संस्थानों में बायोमीट्रिक मशीनें स्थापित करना अनिवार्य हो चुका है। मगर प्रदेश के कई स्कूलों में ये मशीनें उपलब्ध नहीं है। मशीनों की खरीद के लिए बजट भी अधिकांश स्कूलों के पास उपलब्ध नहीं है और खराब हुई बायोमीट्रिक मशीनें भी मरम्मत करवाने के लिए न इंजीनियर्स आते हैं और न ही मरम्मत के बिल अदा करने के लायक बजट उपलब्ध है। बायोमीट्रिक उपस्थिति में सबसे बड़ी बाधा उन स्कूलों की है, जिनमें अब तक बिजली ही उपलब्ध नहीं है। क्योंकि स्कूलों के नाम भूमि न होने के चलते आज तक कई स्कूलों को बिजली का कनेक्शन विद्युत बोर्ड ने नहीं दिया है।
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इसके अलावा समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों को दी जा रही ग्रांट भी नाकाफी साबित हो रही है। स्कूलों के पास इतना बजट भी नहीं हो पा रहा है कि वे बिजली के बिल भर सकें। इसके चलते कुछ दिन पहले स्कूलों के बिजली कनेक्शन तक काटने के मामले उभरे हैं। शिक्षा विभाग ऐसे में समग्र शिक्षा अभियान के तहत इस बारे में पर्याप्त बजट की व्यवस्था करे।
यह मांग राजकीय प्रशिक्षित कला स्नातक संघ प्रदेश महासचिव विजय हीर ने प्रारंभिक शिक्षा एवं समग्र शिक्षा अभियान निदेशक से की है। हीर ने कहा कि 2 वर्ष पूर्व समग्र शिक्षा अभियान ने सभी स्कूलों से एसएसए की उपयोग न हुई राशि और खातों का ब्याज वापस ले लिया था और यह करोड़ों रुपये की राशि है, जिससे बायोमीट्रिक मशीनों की खरीद और मरम्मत संभव है, जबकि 10 हजार रुपये अनुदान में ही गुजारे को विवश स्कूलों में बिजली बिल भुगतान और इंटरनेट, कंप्यूटर्स आदि की व्यवस्था करने के लिए बजट दिया जाना चाहिए।
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स्कूलों को दी जा रही कंपोजिट ग्रांट की दस हजार राशि का बड़ा भाग बिजली बिलों के भुगतान में चला जाता है और स्कूल की मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बजट नहीं हो पाता है । साल में 4 आवधिक परीक्षाएं और 2 छमाही परीक्षाएं ली जा रही हैं, जिनके प्रश्न-पत्रों का खर्चा भी बहुत होता है। मिडल स्कूलों में कम अनुदान और कंप्यूटर, इंटरनेट और प्रिंटर न होने के चलते व्यवस्था चलाना जटिल है और ऐसे में समग्र शिक्षा अभियान की ग्रांट भी संशोधित की जानी चाहिए।
इसके अलावा पीएफएमएस के उपयोग में आ रही दिक्कतों का ध्यान रखते हुए चेक पेमेंट्स बहाल करने चाहिए, जिनको एचडीएफसी बैंक ने बेवजह रोक रखा है और ऐसे में स्कूल चेक बुक्स भी इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।
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