बिझड़ी (हमीरपुर)। उपमंडल बड़सर के भालत गांव में बनी सिंचाई योजना विभागीय अनदेखी का शिकार हो गई है। तीन वर्ष भूस्खलन की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हुई योजना को अभी तक विभाग सुचारू नहीं कर पाया है। सिंचाई योजना के बंद होने से किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जलशक्ति विभाग ने 27 वर्ष पूर्व 50 लाख रुपये खर्च कर सिंचाई योजना शुरू की थी। योजना का मकसद किसानों की खेतीबाड़ी के लिए बारिश पर निर्भरता को कम करना था। इसके साथ ही सिंचाई योजना के माध्यम से किसानों को नकदी फसलों की खेती की ओर आकर्षित करना भी था। योजना के शुरू होने के बाद कई किसानों ने पारंपरिक खेली के साथ मटर, प्याज, लहसुन और कचालू जैसी नकदी फसलें उगाना भी शुरू किया। इससे किसानों ने मुनाफा भी कमाया। मगर अब किसानों को सिंचाई सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
स्थानीय किसानों में बलदेव, रवि प्रकाश, लौका राम, युद्धवीर, राजीव और रमेश कुमार ने कहा कि तीन वर्ष पहले भूस्खलन के कारण सिंचाई योजना की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इसके बाद विभाग ने योजना की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। अब योजना की वाटर लिफ्टिंग मोटर भी जंग खा रही है और आधा समान गायब हो चुका है। योजना को बिजली आपूर्ति करने वाला ट्रांसफार्मर भी खस्ता हाल हो गया है।
क्षेत्र के किसान कई बार सिंचाई योजना को शुरू करने की मांग उठा चुके हैं। मगर अभी तक धरातल पर कुछ नहीं हो सका है। किसानों का कहना है कि योजना के जीर्णोद्धार के लिए जलशक्ति विभाग ने 70 लाख रुपये का प्रपोजल भी तैयार किया था, लेकिन बजट ही नहीं मिल सका है। किसानों ने मांग की है कि जल्द से जल्द योजना का जीर्णोद्धार किया जाए, ताकि उनको लाभ मिल सके।
यह स्कीम काफी समय से बंद है। इसमें काम ज्यादा होना है। इस स्कीम को दोबारा चलाने में थोड़ा समय लगेगा। विभाग की ओर से 70 लाख रुपये का प्रपोजल भेजा गया था, ताकि योजना का जीर्णोद्धार किया जा सके। मगर अभी बजट राशि जारी नहीं हुई है।
- देव राज चौहान, अधिशासी अभियंता, जल शक्ति विभाग, बड़सर