हमीरपुर। हवा से हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस को आयुर्वेद विभाग की धूपन प्रक्रिया से खत्म किया जा रहा है। इस धूपन में विभिन्न प्रकार के पौधों, हवन सामग्री और आयुष काढ़े का मिश्रण जलाया जाता है और इससे निकलने वाले धुएं से हानिकारक बैक्टीरिया या वायरस जो हवा में, धरती के तल पर, भवन के किसी फर्नीचर या वस्तु पर होते हैं, को नष्ट किया जाता है। आयुर्वेद के इस 5000 साल पुराने उपाय का प्रयोग कोरोना वायरस से बचने के लिए आयुर्वेदिक अस्पताल हमीरपुर में किया जा रहा है। अस्पताल में बाहर से मरीज आ रहे हैं। उनके साथ कई हानिकारक बैक्टीरिया या वायरस अस्पताल में प्रवेश कर रहे हैं। ऐसे में वह वायरस अन्य स्टाफ व लोगों को हानि न पहुंचाए, इसके लिए यह धूपन प्रक्रिया अमल में लाई जा रही है।
बता दें कि आयुर्वेद के इस नुख्शे से शत प्रतिशत वायरस व बैक्टीरिया खत्म होते हैं। इस धूपन प्रक्रिया में हवन सामग्री, दशमूल क्वाथ (दस विभिन्न औषधीय पौधों की जड़ें), गूगल, हल्दी और काढ़े का मिश्रण किया जाता है। इसे जलाकर इसका धुआं समस्त भवन में पहुंचाया जाता है। इससे हवा या विभिन्न स्थानों पर मौजूद वायरस नष्ट होता है। धूपन प्रक्रिया को वर्तमान में बड़े पैमाने पर पपरोला रिसर्च संस्थान में अपनाया जा रहा है। जहां इस धूपन प्रक्रिया को बड़ी-बड़ी मशीनों के माध्यम से अमल में लाया जाता है। आयुर्वेदिक अस्पताल हमीरपुर की एमएस डॉ. पूनम ने कहा कि यह पद्धति पांच हजार साल पुरानी है। धूपन से हवा व अन्य स्थानों पर मौजूदा हानिकारक बैक्टीरिया व वायरस नष्ट होते हैं। आयुर्वेदिक अस्पताल हमीरपुर में इस प्रक्रिया को रोजाना अमल में लाया जा रहा है। ताकि बाहर से आने वाले लोगों से वायरस अस्पताल में न आए। कोरोना काल में यह महत्वपूर्ण है।