गारली (हमीरपुर)। छुट्टी वाले दिन को छोड़ अब वर्किंग-डे (कार्यदिवस) में जनमंच कार्यक्रम करवाने को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। इससे पहले रविवार को छुट्टी वाले दिन ही जनमंच होते रहे हैं। जिसके चलते सरकारी और अर्ध सरकारी विभागों में सेवाएं देने वाले कर्मचारियों के अलावा निजी कंपनियों के कर्मचारी भी जनमंच में अपनी फरियाद सुना सकते हैं। पहली बार 12 फरवरी 2020 बुधवार को जनमंच कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यदिवस पर जनमंच के चलते एक तो फरियादों की संख्या कम हो जाएगी, दूसरी तरफ सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के जनमंच में पहुंचने से पीछे कार्यालय में ताला लगाने की नौबत आ जाएगी। जिससे कार्यालयों में काम करवाने वाले लोग भी परेशान होंगे। ग्रामीणों में सुरेश कुमार, विजय ठाकुर, सुनील शर्मा, प्रदीप ठाकुर और विधि चंद ने कहा कि कार्यदिवस पर जनमंच करवाना सरकार की लापरवाही है।
जनता के हितों की बात करने वाले ये भूल चुके हैं कि वर्किंग डे में जनमंच कार्यक्रम करवाने से जनता को कितनी बड़ी समस्याओं व कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। दिन भर चलने वाले इस कार्यक्रम के कारण लगभग सभी विभागों के कर्मचारी और अधिकारी दफ्तरों में गैर हाजिर पाए जाएंगे। जिससे लोगों के कामकाज लटकेंगे। लेकिन, इस तरफ सरकार का बिल्कुल भी ध्यान नहीं जा रहा है। 12 फरवरी को टिप्पर पंचायत में 20वां जनमंच कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। वर्किंग डे में आयोजित इस कार्यक्रम से जहां बड़सर की 10 पंचायतों के लोगों की समस्याओं को सुना जाएगा वहीं, विधानसभा की शेष 38 पंचायतों के लोगों को यदि अपने जरूरी कामकाज के लिए दफ्तरों का रुख करना पड़ा तो ऐसे में कर्मचारियों व अधिकारियों की गैर हाजिरी के कारण काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। वर्किंग डे में आयोजित किए गए जनमंच कार्यक्रम को लेकर जनता को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए सरकार ठोस प्लानिंग तैयार करे। सरकार इस बार जनमंच कार्यक्रम की तारीख तीन बार बदल चुकी है। वहीं जिला अधिकारियों का कहना है कि सरकार के आदेशों के तहत कार्यदिवस पर जनमंच हो रहा है।