नादौन (हमीरपुर)। हिमाचल राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद ने बीए संस्कृत वर्ग को डिग्री के स्थान पर शास्त्री डिग्री देने की केंद्रीय विश्वविद्यालय की घोषणा का विरोध किया है। परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि बीए संस्कृत वर्ग को शास्त्री की डिग्री दी जा सकती है तो बीए में गणित पढ़ने वाले को भी बीएससी की डिग्री दे दी जाए। इसके साथ लोक प्रशासन और राजनीति शास्त्र पढ़ने वाले को लॉ की डिग्री दे दी जानी चाहिए। परिषद के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. मनोज शैल, महासचिव अमित शर्मा, कोषाध्यक्ष सोहन लाल, उपाध्यक्ष अमर सेन, तेजस्वी शर्मा, कमलेश कुमारी आदि ने कहा कि जो पांच वर्ष में अंग्रेजी, राजनीति शास्त्र या इतिहास के साथ कम से कम बीस पेपर संस्कृत के ग्रंथों के पढ़ता है, उसे प्रदेश विश्वविद्यालय और अन्य विश्वविद्यालय शास्त्री की डिग्री देते हैं। लेकिन, जो मात्र तीन वर्ष में तीन या चार पत्र संस्कृत के पढ़ता है उसे शास्त्री की डिग्री देने की घोषणा की जा रही है। जब बीए में संस्कृत पढ़कर शास्त्री की डिग्री मिल जाएगी तो संस्कृत कॉलेजों का महत्व ही क्या रह जाएगा। सभी बीए ही करेंगे तो पंचवर्षीय शास्त्री कौन करेगा। डॉ. मनोज ने कहा कि वह संस्कृत के छात्रों का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि, पाठ्यक्रम का विरोध कर रहे हैं। अगर शास्त्री और बीए संस्कृत के पाठ्यक्रम को समान कर दें और फिर शास्त्री की डिग्री दें तो परिषद इसका स्वागत करेगी। डॉ. मोहन ने कहा कि विश्वविद्यालय को पहले पाठ्यक्रम समान करना चाहिए। फिर इस विषय पर विचार करना चाहिए।