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जहां खुद पढ़ाई की, वहां नवाजे धूमल ने मेधावी

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टौणीदेवी (हमीरपुर)। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि टौणीदेवी स्कूल और इस धरती के साथ जीवन के बहुत महत्वपूर्ण वर्ष बीते हैं। टौणीदेवी स्कूल का इतिहास गौरवमयी है। धूमल ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टौणीदेवी के वार्षिक समारोह में होनहारों को पुरस्कृत किया। इनाम बांटने के बाद उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों को संबोधित करते हुए धूमल ने कहा कि उन्होंने स्वयंविजेता खिलाड़ियों को मेडल पहनाकर सम्मानित किया।
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इसी स्कूल से शिक्षा ग्रहण की है। विद्यार्थी जीवन के सहपाठियों और स्कूली दिनों को याद करते हुए उन्होंने कुछ स्मृतियां भी साझा कीं।
धूमल ने बताया कि स्कूल की शुरुआत 1905 में स्व. महाशय निरंजन सिंह ने की थी। बाद में स्व. गोविंद राम ने बतौर मुख्याध्यापक इस स्कूल को आगे बढ़ाने में बहुत मेहनत की। पहले यह डीएवी स्कूल था। विद्यार्थी जीवन को याद करते हुए उन्होंने शक्ति चंद, कैप्टन जगदीश चौहान, रोशन लाल रांगड़ा का नाम लिया। उन्होंने कहा कि पुराने समय में परीक्षा में 60 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण छात्र सबकी प्रशंसा का पात्र बन जाया करता था। लेकिन, आज का विद्यार्थी 99 प्रतिशत अंक आने पर संतुष्ट नहीं होता। जिस दौर में आज का विद्यार्थी जी रहा है, वहां प्रतिस्पर्धा बहुत है। अब शत प्रतिशत नंबर लेकर न जाने कितने बच्चे प्रथम स्थान पर आएंगे और फिर आगे न जाने किस योग्यता के आधार पर बढ़ेंगे। जो सक्षम होंगे, चुस्त होंगे वह ही सफल हो पाएंगे। धूमल ने विद्यालय की गतिविधियों को बढ़ाने के लिए दस हजार रुपये दिए। प्रधानाचार्य वंदना धीमान ने वार्षिक रिपोर्ट पढ़ी और स्कूल की गतिविधियों की जानकारी दी। इससे पहले मुख्यातिथि का स्कूल पहुंचने पर स्वागत किया गया।
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