बडसर (हमीरपुर)। उत्तरी भारत के प्रसिद्ध सिद्धपीठ बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में मंदिर ट्रस्ट और मंदिर के महंत राजिंद्र गिरी के बीच संपत्ति विवाद का निपटारा होने के बाद महंत ने उनके हिस्से में आई संपत्तियों का संचालन अपने हाथ लेने का क्रम शुरू कर दिया है। संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर ट्रस्ट और महंत के बीच आपसी सहमति से संपत्तियों का बंटवारा हुआ है। इस बंटवारे को प्रदेश सरकार की मंजूरी दिए जाने के बाद जिलाधीश हमीरपुर की ओर से अमल में लाया गया है। इस समझौते के तहत महंत राजिंद्र गिरी ने मंदिर के समीप स्थित बकरा स्थल और मंदिर को जाने वाले रास्ते का भाग मंदिर न्यास को छोड़ा है।
जिससे बाबा बालक नाथ की मेन गुफा और आसपास का मंदिर परिसर का क्षेत्र मंदिर ट्रस्ट के नाम हो गया है। जबकि समझौते से पहले इसका काफी हिस्सा राजस्व रिकॉर्ड में महंत के नाम दर्ज था। श्रद्धालु हित में महंत ने मंदिर परिसर के इस हिस्से को ट्रस्ट को सौंप दिया है। इस बंटवारे के तहत दियोटसिद्ध के ऊपरी बाजार में स्थित दुकानों के अलावा ऊपरी बाजार में स्थित एक सराय भी मंदिर के महंत के हिस्से में आई है। वहीं, ट्रस्ट ने महंत निवास के आसपास वाले हिस्से को महंत को सौंप दिया है।
महंत निवास की प्रबंधक कमेटी ने गत दिवस सराय का संचालन करने वाले प्रबंधक और अन्य कर्मचारियों से सराय की चाबियां और उसका नियंत्रण लेकर अपने स्तर पर इसका संचालन करना शुरू कर दिया है। इस मामले में मंदिर के महंत राजिंद्र गिरी ने कहा कि संपत्ति का यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चला था। जहां से फैसला उनके हक में आया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश सरकार ने कैबिनेट बैठक में मंदिर ट्रस्ट को संपत्तियों का आपसी समझौते के तहत बंटवारा करने की स्वीकृति दी है। महंत आवास के समीप की जमीन, दुकानें और सराय उनके हिस्से में आई है। इस बारे में बाबा बालक नाथ न्यास के अध्यक्ष एवं एसडीएम बड़सर विशाल शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार महंत के हिस्से में जो संपत्ति आई थी, उसमें से महंत ने बाबा बालक नाथ गुफा के साथ बकरा स्थल तथा साथ की जमीन बाबा बालक नाथ ट्रस्ट को दे दी है। जबकि, ट्रस्ट में महंत निवास के समीप दुकानें तथा एक सराय महंत को हस्तांतरित कर दी है।