बड़सर (हमीरपुर)। उपमंडल के एक निजी स्कूल में दसवीं कक्षा के सात विद्यार्थियों के संस्कृत विषय में पुनर्मूल्यांकन के बाद अंक बढ़ गए है। हालांकि इससे बच्चों में खुशी है, लेकिन अभिभावकों ने प्रथम मूल्यांकन के दौरान अध्यापकों पर पेपर चेकिंग में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं। एक ही स्कूल के सात विद्यार्थियों के पुनर्मूल्यांकन के बाद दस से 17 अंक बढ़ने से जहां बच्चों में खुशी है वहीं प्रथम मूल्यांकन करने वाले अध्यापकों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं। छात्रों का कहना है कि परीक्षा अच्छी होने के बाद जब परिणाम संतोषजनक नहीं आया तो पुर्नमूल्यांकन के लिए आवेदन किया। इसके बाद उम्मीद के अनुसार नंबर आए, लेकिन पहले मूल्यांकन में निराशा ही हाथ लगी थी।
स्कूल के दसवीं की बोर्ड परीक्षा परिणाम में सात विद्यार्थियों के संस्कृत विषय को छोड़कर 90 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त हुए। छात्रों में अपूर्वा, मानवी, स्मृति, राधिका, रितिशा, कनुकरण तथा दीक्षा ने उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन पर सवाल उठाते हुए पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया। इसके बाद विद्यार्थियों के संस्कृत विषय में 10 से 17 अंक तक बढ़े हैं। अभिभावकों में राजेश कुमार, रवि कुमार, ओम चंद, राजेंद्र कुमार, नवीन का कहना है कि मूल्यांकन के समय अध्यापकों की लापरवाही से बच्चे निराश हो गए थे। लेकिन, अंक बढ़ने से बच्चे खुश हैं। पुनर्मूल्यांकन में अंक बढ़ने पर स्कूल की प्रार्थना सभा में प्रिंसिपल ने इन सभी मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया व बधाई दी है। अभिभावकों ने उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन में लापरवाही बरतने पर अध्यापक पर कार्रवाई करने की मांग की है। संबंधित स्कूल प्रिंसिपल डिंपल कपिल का कहना है कि दसवीं की बोर्ड परिणाम में संस्कृत विषय में पुनर्मूल्यांकन को आवेदन करने के बाद बच्चों के 10 से 17 अंक बढ़े हैं। पांच विद्यार्थियों के 95 फीसदी से अधिक अंक हो गए हैं। उन्होंने पुनर्मूल्यांकन के उपरांत अंक बढ़ने पर सभी मेधावी विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों को बधाई दी है।