हमीरपुर। जिला प्रशासन 22 अप्रैल तक स्कूली बसों के निरीक्षण के लिए विशेष अभियान चलाएगा। इस बारे अतिरिक्त उपायुक्त रत्न गौतम ने सोमवार को उपमंडल अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि वाहनों को लेकर सुरक्षा मापदंड बनाए गए हैं। प्रत्येक स्कूल वाहन का रंग पीला होना चाहिए और वाहन के दोनों तरफ स्कूल का नाम अंकित हो। वाहनों के आगे और पीछे स्कूल बस लिखा हो। चालक का नाम, पता, लाइसेंस नंबर और बैच नंबर भी वाहन में लिखा हो। स्कूल वाहन की खिड़कियों में ग्रिल लगाना अनिवार्य है और ग्रिल तारों की होनी चाहिए। प्रत्येक वाहन में आपातकालीन दरवाजे सुनिश्चित किए जाना जरूरी है। सभी स्कूल वाहनों में स्पीड गवर्नर लगे होने चाहिए और वाहन की स्पीड 40 से अधिक न हो। वाहनों में आईएसआई मार्क के अग्निशमन उपकरण होने चाहिए।
वाहनों की सीटें गैर-दहनशील उत्पाद से बनी होनी चाहिए। प्रत्येक स्कूल बस में जीपीएस और सीसीटीवी की व्यवस्था होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्कूल में ट्रांसपोर्ट मैनेजर की तैनाती करना जरूरी है। चालक के पास कम से कम 5 साल के अनुभव और लाइसेंस होल्डर परिचालक भी बस में तैनात किया जाना चाहिए। चालक का प्रत्येक वर्ष मेडिकल टेस्ट और आंखों का टेस्ट अनिवार्य है। स्कूल बसों में अलार्म की व्यवस्था बेहद जरूरी है। प्रत्येक बस में लेडी गार्ड की तैनाती किया जाना भी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि कोई भी स्कूल बिना परमिट के किसी भी वाहन को बच्चों के यातायात की इजाजत नहीं दे सकता। स्टेट ट्रांसपोर्ट विभाग से वाहन का परमिट करवाना अनिवार्य है। सभी स्कूल वाहनों और उसमें सवार बच्चों का इंश्योरेंस करवाना जरूरी है। अगर किसी चालक का साल में दो बार सड़क नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आता है या फिर पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज होता है तो उसे तत्काल सेवाओं से हटाना जरूरी है। वाहन में 12 साल से ऊपर के बच्चों को एक आदमी के तौर पर ट्रीट किया जाएगा। वाहन में बच्चों को जबरन ठूंसा नहीं जाएगा। किराए पर चलाए जा रहे स्कूल वाहनों के मामले में स्कूल प्रबंधन का ट्रांसपोर्टर के बीच एग्रीमेंट होना चाहिए और वाहन में एग्रीमेंट की कॉपी भी साथ होना होनी चाहिए। अभिभावक बच्चों को ले जा रहे वाहनों की कमियां पर पूरी नजर रखें और इसकी सूचना तत्काल स्कूल प्रबंधक को दें। इस अवसर पर जिला के सभी उपमंडलाधिकारी उपस्थित रहे।