हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश मुख्याध्यापक प्रधानाचार्य अधिकारी वर्ग का कहना है कि अगर 15 अगस्त को पूर्व सैनिक प्रदेश सरकार के विरोध में धरना प्रदर्शन करेंगे तो प्रदेश के सभी अध्यापक संघ और पूर्व सैनिकों के बेरोजगार आश्रित सरकार के समर्थन में प्रदर्शन रैली करेंगे। संघ ने कहा कि देश में केवल हिमाचल प्रदेश के सैनिकों जो आर्म्ड फोर्स डिमोवेलाइज्ड एक्ट के अंतर्गत नहीं आते हैं उन्हें वर्ष 1981 से वित्तीय लाभ और वरिष्ठता दी गई। ऐसे में कनिष्ठ कर्मचारी अपने अधिकारियों के वरिष्ठ बन बैठे हैं।
संघ का कहना है कि फौज में पढ़ाई करने वाला और 15 साल फौज में नौकरी करने के बाद जब कोई सैनिक सेवानिवृत्त होता है तो उसे उसके गुरू जिसने उसे पढ़ाया हो, उससे भी ऊंचे पद पर बैठा दिया जाता है। इस कारण वरिष्ठ अधिकारियों का मनोबल गिरता है। शिक्षा विभाग के अधिकतम पदों पर पूर्व सैनिक तैनात हैं। संघ के प्रदेशाध्यक्ष विजय गौतम का कहना है कि इस संबंध में 14 जुलाई को सभी शिक्षक संघों ने सुंदरनगर में संयुक्त मीटिंग कर निर्णय लिया है कि अगर पूर्व सैनिक सरकार के फैसले के विरोध मेें धरना करेंगे तो सभी अध्यापक संघ और पूर्व सैनिकों के बेरोजगार आश्रित सरकार के समर्थन में प्रदर्शन करेंगे। इस संयुक्त मीटिंग में प्रदेश पदोन्नत प्रवक्ता संघ के प्रदेशाध्यक्ष रत्नेश्वर सलारिया, विज्ञान अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष अजय शर्मा, कला अध्यापक संघ और मुख्याध्यापक-प्रधानाचार्य अधिकारी संघ सहित अन्य संघों के पदाधिकारी मौजूद रहे।