भोरंज(हमीरपुर)। उपमंडल भोरंज में प्रदेश की पहली कंप्यूटरीकृत पेयजल योजना होने के बाद भी पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। उपमंडल की 33 पंचायतों में नियमित पेयजल आपूर्ति न होने से लोग को परेशानी हो रही है। कस्बे मेें प्रतिदिन 65 लाख लीटर पानी की जरूरत है और प्रोजेक्ट से प्रतिदिन 65 लाख लीटर पानी की सप्लाई की जाती है। इसके बावजूद लोगों को पेयजल की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। बिजली की कमी और पानी की कमी के कारण कई बार प्रोजेक्ट बंद भी रहता है। इस कारण लोगों को और भी परेशानी होती है। प्रोजेक्ट बंद होने से कई बार लोगों को एक-एक सप्ताह के बाद पानी आता है। कस्बे में इतनी बड़ी योजना होने के बाद भी लोग प्यासे हैं।
जाखू के पास व्यास नदी के किनारे इस परियोजना के 6 कुएं बने हैं। जिनमें से दो कुएं सूख गए हैं। वहीं योजना में स्थापित 6 मोटरों में से 3 या 4 मोटरें ही चलाई जाती हैं। भोरंज की छह स्थानीय पेयजल योजनाएं 60 फीसदी सूख चुकी हैं। इसके चलते विभाग ने प्रोजेक्ट से लगभग 15 लाख लीटर पानी की मांग और की है ताकि लोगों को पानी की समस्या से निजात दिलाई जा सके। उपमंडल के आधे गांवों में ही पर्याप्त पानी पहुंचता है। वहीं आधे गांवों के नल सूखे रह जाते हैं। जब भी लोग विभाग से इसकी शिकायत करते हैं तो जवाब मिलता है कि पेयजल पाइप में हवा भर गई है। पानी की सप्लाई पर्याप्त न होने से ग्रामीणों में रोष हैं। भोरंज में लगभग 125 व्यावसायिक पेयजल कनेक्शन है, जबकि 15800 घरेलू पेयजल कनेक्शन हैं। जिन्हें 31.40 रुपये प्रति माह के हिसाब से पानी मिलता है। जब से मेवा लगवालती योजना बनी है तब से विभाग और सरकार ने इसकी कोई सुध नहीं ली है और न ही कोई नया कुआं बनाया है। सरकार ने बिजली वोल्टेज से जूझ रही इस परियोजना का हल नहीं निकाला।
6 पेयजल योजनाएं 60 फीसदी सूखी
भोरंज आईपीएच विभाग के सहायक अभियंता अजय वर्मा का कहना है कि भोरंज की करीब 6 स्थानीय पेयजल योजनाएं 60 फीसदी सूख चुकी हैं। प्रोजेक्ट से करीब 10 लाख लीटर पानी की अतिरिक्त मांग की गई है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया है वह पेयजल को व्यर्थ न बहाएं ताकि जिन घरों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है उन्हें भी पानी मिल सके।
क्या कहते हैं विधायक
विस क्षेत्र भोरंज की विधायक कमलेश कुमारी का कहना है कि इस बार भोरंज के लिए एक नई पेयजल योजना का प्रस्ताव रखा है। पेयजल योजना के निर्माण से पानी की किल्लत कम हो सकती है। उन्होंने कहा कि भोरंज के कई गांव मेवा लगवालती परियोजना से नहीं जुड़ पाए है। इस योजना से उन गांवों को लाभ होगा।