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खस्ताहाल सड़कें बन रही हादसों का कारण

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हमीरपुर। झनियारी में निजी स्कूल बस हादसे ने फिर व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खस्ताहाल सड़कें और खटारा निजी स्कूली बसें बच्चों और उनके अभिभावकों को लगातार जख्म दे रही हैं। प्रदेश में एक के बाद एक निजी स्कूल बस हादसे हो रहे हैं। सिरमौर में हाल ही में पांच जनवरी को निजी स्कूल की बस पलटने से चालक समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। इसी तरह पिछले साल कांगड़ा के नूरपुर बस हादसे में 27 बच्चों समेत 30 लोगों की जान चली गई थी। इन दर्दनाक हादसों के बावजूद प्रदेश सरकारें और प्रशासन स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। नूरपुर बस हादसे में स्कूली बच्चों की मौत के बाद हमीरपुर प्रशासन ने जगह-जगह नाके लगाकर स्कूली बसों की जांच की। लेकिन, उसके बाद यह मुहिम ठंडे बस्ते में पड़ गई। लोगों में सुनील कुमार, सुशील शर्मा, जसवीर कुमार और पंकज ठाकुर का कहना है कि वर्तमान में हमीरपुर जिले के कई स्कूलों के बाहर टैक्सियों और निजी वाहनों को स्कूली बच्चों को ढोते देखा जा सकता है। जबकि इन वाहनों में नियमों के मुताबिक न तो स्पीड गवर्नर होते हैं और न वाहनों का रंग पीला और न ही छात्रों के लिए अन्य सुविधाएं।
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उधर, हमीरपुर के झनियारी में निजी स्कूल बस हादसे के पीछे पुलिस बस चालक की लापरवाही बता रही है तो बस चालक स्टीयरिंग लॉकिंग को हादसे का कारण बता रहा है। दूसरी ओर लोगों का कहना है कि जिला मुख्यालय की सड़कें वाहन चलाने के काबिल नहीं हैं। हमीरपुर से ज्वालामुखी तक नेशनल हाईवे पर गड्ढों की भरमार है। बीते डेढ़ साल से राष्ट्रीय राजमार्ग की मरम्मत नहीं हुई। इन सड़कों पर आए दिन हादसे हो रहे हैं। लेकिन, अभी तक प्रशासन की नींद नहीं खुल रही।

जिले के सभी स्कूल वाहनों की चेकिंग के निर्देश
उधर, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी वीरेंद्र शर्मा का कहना है कि उन्होंने जिले के सभी स्कूल वाहनों की चेकिंग के निर्देश दिए हैं। शीघ्र पूरे जिले में स्कूल वाहनों की चेकिंग के लिए अभियान चलाया जाएगा। उधर, नेशनल हाईवे अथॉरिटी के परियोजना निदेशक योगेश राउत का कहना है कि शीघ्र ही मटौर से लेकर शिमला तक बनने वाले फोरलेन के टेंडर होने वाले हैं। उन्होंने बताया कि जरूरी जगह पर पैचवर्क करवाए जाएंगे।
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बाक्स:
स्कूल बस की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट के ये हैं दिशा निर्देश
-बस चालक के पास हैवी ट्रांसपोर्ट व्हीकल लाइसेंस होना
-बस के आगे और पीछे स्कूल बस लिखा होना
-बस पर स्कूल ड्यूटी भी लिखा होना
-बस के अंदर फर्स्ट एड बॉक्स का होना
-स्कूल बस में स्पीड नियंत्रित करने को स्पीड गवर्नर होना
-स्कूल वाहन का रंग पीला हो ताकि दूर से नजर आए।
-खिड़की में शीशे के साथ ग्रिल भी होना
-बस में आग बुझाने का इंतजाम होना
-स्कूल बस पर स्कूल का नाम, उसका फोन नंबर लिखा होना
-बस में स्कूल का एक वर्दी में सहायक भी होना
-बस के दरवाजे में मजबूत लॉक लगे होना
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