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कम परीक्षा परिणाम देने पर शिक्षकों की वेतन वृद्धि रोकने का विरोध

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कम परीक्षा परिणाम पर शिक्षकों की वेतन वृद्धि रोकने का विरोध
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कहा, विभाग का निर्णय पूरी तरह से एकतरफा, शिक्षकों का पक्ष नहीं सुना
शिक्षा विभाग और सरकारी नीतियों को खराब परिणाम के लिए ठहराया जिम्मेदार
अमर उजाला ब्यूरो
हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के अध्यक्ष केसर सिंह ठाकुर, राज्य महासचिव संजीव ठाकुर और कार्यकारी अध्यक्ष रामकृष्ण मार्कंडेय ने शिक्षा विभाग की ओर से कम परीक्षा परिणाम देने पर शिक्षकों की वेतन वृद्धि रोके जाने के फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा कि विभाग की ओ से लिया गया निर्णय पूरी तरह एक तरफा है। इसमें शिक्षकों के पक्ष को नहीं सुना गया। केसर सिंह ने कहा कि यदि बच्चों का परीक्षा परिणाम कम आता है तो इसके लिए शिक्षा विभाग और सरकार की नीतियां भी जिम्मेदार हैं। कम परिणाम की जवाबदेही एकतरफा निश्चित नहीं की जा सकती।
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एक अध्यापक साल भर शिक्षण का कार्य करता है, मात्र 3 घंटे में उसकी योग्यता का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता। विभाग को चाहिए कि एक अध्यापक को साल भर में धरातल पर आने वाली समस्याओं का अध्ययन करें और समस्याओं का समाधान करें। दूसरी तरफ सरकार को भी पहली से आठवीं तक बच्चों को फेल न करने की नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए और बीच सत्र में शिक्षकों के स्थानांतरण पर भी रोक लगानी चाहिए। रामकृष्ण ने कहा कि शिक्षा विभाग का यह निर्णय शिक्षकों में भय पैदा करने का प्रयास है। इस निर्णय के संदर्भ में वे मुख्यमंत्री से मिलेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के हक की लड़ाई के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।
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