हमीरपुर। फर्जी डिग्री मामले में नौ महीने के बाद न तो प्रदेश शिक्षा विभाग ने कोई कार्रवाई की और न ही विजिलेंस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की है। शिक्षा विभाग दोषी अध्यापकों पर कार्रवाई करने से पूर्व विजिलेंस की एफआईआर का इंतजार कर रही है। जबकि, विशेषज्ञों की मानें तो जांच रिपोर्ट में अध्यापकों की फर्जी डिग्रियां पाए जाने पर प्रदेश शिक्षा विभाग दोषी अध्यापकों पर कार्रवाई करने में सक्षम था। बता दें कि वर्ष 2004-05 में प्रदेश शिक्षा विभाग में अध्यापकों की भर्तियां हुई थीं।
इन भर्तियों के दौरान करीब दो दर्जन अभ्यर्थियों ने बिहार की मगध यूनिवर्सिटी से बिना परीक्षा दिए ही जाली सर्टिफिकेट और डिग्रियों के आधार पर नौकरी हासिल की। इस मामले की शिकायत राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो शिमला में की गई। जिसके बाद हमीरपुर से विजिलेंस की टीम मार्च 2018 को बिहार के मगध विश्वविद्यालय पहुंची। विजिलेंस टीम ने करीब एक हफ्ते तक मगध विवि में अध्यापकों की डिग्रियों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले, लेकिन उन्हें न तो अध्यापकों के प्रवेश और न ही परीक्षाओं से जुड़े कोई दस्तावेज मिले। जिसके बाद विजिलेंस ने इस जांच रिपोर्ट को मार्च महीने में ही शिमला विजिलेंस मुख्यालय में जमा करवाया। लेकिन, नौ महीने बीत जाने के बावजूद न तो शिक्षा विभाग ने कोई कार्रवाई की और न ही विजिलेंस। इस मामले में एफआईआर के बाद कोर्ट में चालान पेश होना था।
क्या कहते हैं अधिकारी-
हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा का कहना है कि विजिलेंस ने इस मामले की जांच की है। लेकिन, एफआईआर दर्ज न होने के कारण आगामी कार्रवाई नहीं हो पाई। एफआईआर दर्ज होने के बाद दोषी अध्यापकों पर आगामी कार्रवाई होगी। उधर, प्रदेश शिक्षा विभाग के निदेशक अमरजीत सिंह का कहना है कि अध्यापकों की फर्जी डिग्री मामले पर कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई इस मामले की जांच की जाएगी।
फर्जी दस्तावेज विभागीय कार्रवाई के लिए काफी : गर्ग
राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो शिमला के एडीजीपी अनुराग गर्ग का कहना है कि वह अवकाश पर हैं। इस मामले की पुलिस अधीक्षक विजिलेंस और हमीरपुर विजिलेंस कार्यालय से जानकारी ली जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर जांच में दस्तावेज फर्जी निकले हैं तो यह विभागीय कार्रवाई के लिए काफी होते हैं।