हमीरपुर। जिला मुख्यालय के साथ लगते दड़ूही गांव में हुए करोड़ों के भूमि फर्जीवाड़े में निष्पक्ष जांच के लिए आमरण अनशन पर बैठे ग्रामीणों ने मंगलवार शाम को अनशन खत्म कर दिया। इस मौके पर एसडीएम हमीरपुर शिल्पी बेक्टा ने स्वयं जाकर आमरण अनशन को तुड़वाया। अनशन पर बैठे फिल्लू राम ने प्रशासन से नहीं बल्कि अपनी 93 वर्षीय मां साहणी देवी के हाथों से जूस पीकर अनशन को तोड़ा। अनशन टूटने के बाद भी ग्रामीण बुधवार सुबह तक हड़ताल पर बैठे रहेंगे। इस मौके पर प्रशासन ने भूमि फर्जीवाड़े के दोषियों पर कार्रवाई करने और मामले की निष्पक्ष जांच करने का आश्वासन दिया। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर करीब साढ़े सात बजे प्रशासन ने फिल्लू राम के आमरण अनशन को तुड़वाया।
जिला मुख्यालय के साथ लगते उप महाल विकास नगर में सौ कनाल सरकारी भूमि को मलकीयत में तबदील कर रसूखदारों ने उसका करोड़ों रुपये में सौदा कर डाला है। विकासनगर के रहने वाले फिल्लू ने कहा कि कुछ रसूखदारों ने करीब सौ कनाल सरकारी जमीन मलकीयत भूमि में तबदील कर उसे लगभग 15 करोड़ रुपये में बेच दिया है। उन्होंने कहा कि 2006-07 में हुए बंदोबस्त की नवीन अक्श नक्शा मुसाबी के खसरा नंबर इस्तेमाल साल 1965-66 से कहीं नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिकायत के बावजूद पुराने रिकॉर्ड को नष्ट कर मामले को दबाने का प्रयास राजस्व विभाग कर रहा है। इस बारे 2012 में भी शिकायत की गई थी, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए वह आमरण अनशन पर बैठे थे। अब वह निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा दिलाने के लिए हिमाचल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। एसडीएम शिल्पी बेक्टा का कहना है कि आमरण अनशन को तुड़वा दिया है। प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोष सिद्ध होने पर दोषियों पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।