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खेलों में समाप्त हो राजनीतिक हस्ताक्षेप : युवा

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हमीरपुर। खेलों में राजनीतिक हस्तक्षेप को खत्म किया जाना चाहिए। अधिकतर खेल संघों पर राजनेताओं का कब्जा है। जिसने कभी अपने जीवन में जिलास्तर की खेलों में भाग नहीं लिया। वह खेल संघों के अध्यक्ष बनकर कुर्सी पर बैठे हैं। किसी नेशनल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों में देश का नाम चमकाने वाले खिलाड़ी को खेल संघ के अध्यक्ष और खेल विभाग में ऊंचे पदों पर बैठाना चाहिए।
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यह विचार शनिवार को ‘अमर उजाला’ जिला कार्यालय हमीरपुर में चुनावी संवाद कार्यक्रम में जिलाभर के दो दर्जन से अधिक युवाओं ने साझा किए। युवाओं ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए-नए संस्थानों को खोलने और नई स्कीमों की घोषणाओं की बजाय गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत है। प्रदेशभर में हर क्षेत्र में रोजगार का सृजन हो। श्रम कानूनों को खत्म करने के बजाय उसमें सुधार होने चाहिए। सरकारी क्षेत्र में दी जाने वाली नौकरियों में आउटसोर्स और ठेकेदारी प्रथा को बिल्कुल खत्म किया जाना चाहिए। इससे केवल युवाओं का शोषण हो रहा है। वहीं, प्राकृतिक स्रोतों का सही इस्तेमाल होना चाहिए। निजी कंपनियों को हिमाचल के प्राकृतिक स्रोतों और वन संपदाओं का दोहन करने से रोकने के लिए ठोस नीति बनाने की आवश्यकता है। इस मौके पर सौरव, अमित राव, करण, सचिन लगवाल, अरविंद कुमार, चंदन राणा, जोगिंद्र कुमार, अनिल मनकोटिया, टोनी ठाकुर, निखिल, अभिषेक, सिकंदर आदि युवा मौजूद रहे।

इनसेट-
युवाओं ने इन मुद्दों को भी उठाया:
रोजगार का हो सृजन : मनकोटिया
अनिल मनकोटिया ने कहा कि सबसे ज्यादा समस्या बेरोजगारी की है। पूंजीपतियों का कर्ज माफ करने की बजाय उस राशि को यदि रोजगार सृजन में लगाया जाए तो युवाओं को रोजगार मिलेगा। अनिल ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में बीते 45 वर्षों में सबसे ज्यादा बेरोजगारी की दर बढ़ी है। हमीरपुर समेत प्रदेश में उद्योग खोलकर युवाओं को रोजगार दिए जाने चाहिए।
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आउटसोर्स और ठेका प्रथा हो समाप्त : जोगिंद्र
जोगिंद्र कुमार ने कहा कि आउटसोर्स और ठेका प्रथा को खत्म किया जाना चाहिए। इसके साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र का निजीकरण नहीं होना चाहिए। शिक्षा और स्वास्थ्य को पैसा कमाने के उद्देश्य से नहीं रखना चाहिए। देश के संसाधनों का प्रयोग देश की जनता के हित में ही किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य क्षेत्र में शोध केंद्र खोलकर जहां रोजगार सृजन होगा वहीं, नए शोध भी होंगे।

सरकार को खेल नीति बनानी चाहिए : टोनी
टोनी ठाकुर ने कहा कि खेलों में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। खेल एसोसिएशन में ऐसे राजनीतिक पदाधिकारी बैठा दिए जाते हैं जिनका उस खेल से कोई नाता नहीं होता है। ऐसे में खिलाड़ियों का भविष्य खतरे में रहता है। टोनी ने कहा कि सरकार को खेल नीति बनानी चाहिए और खेलों को बढ़ावा देने के ब्लॉक, स्कूल, कॉलेज स्तर पर ही कोच रखने चाहिए।

शिक्षा के स्तर में हो सुधार : अरविंद
अरविंद कुमार ने कहा कि शिक्षा के स्तर में सुधार होना चाहिए। इसके साथ ही योग्यता रखने वाले को उसके कौशल के हिसाब से वेतनमान मिलना चाहिए ताकि, वह अपने देश की बजाय कम वेतन मिलने के कारण बाहरी देशों में सेवाएं न दें। उन्होंने चिकित्सकों का उदाहरण देते हुआ कहा कि देश में पढ़ाई कर एक अच्छा चिकित्सक बनकर व्यक्ति सही वेतन न मिलने के कारण बाहरी देशों में सेवा देने चला जाता है।

युवाओं को वोट बैंक के रूप में किया जाता है प्रयोग : सचिन
सचिन लगवाल ने कहा कि युवाओं को राजनीतिक दल वोट बैंक के रूप में प्रयोग करते हैं। युवा देश होने के कारण अधिकतर राजनीतिक दल युवाओं को ही अपने वोट बैंक के लिए प्रयोग करते हैं। रूसा में एक वर्ष का सिस्टम तो कर दिया गया लेकिन, एक साथ आठ पेपर देने में छात्रों को परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि कॉलेज लेवल पर छात्र राजनीति हो, ताकि छात्रों के मुद्दों को भी रखा जा सके।

लोकल खिलाड़ियों को दी जाए तवज्जो: चंदन
चंदन राणा ने कहा कि मेडल पाने की होड़ में कई बार एसोसिएशन लोकल खिलाड़ियों की बजाय बाहर के खिलाड़ियों को टीम में शामिल कर लेती हैं। लोकल खिलाड़ियों को तवज्जो मिलनी चाहिए। इसके साथ ही खिलाड़ियों की डाइट भी उचित होनी चाहिए। खिलाड़ियों की डाइट के साथ कोई भी समझौता या भेदभाव नहीं होना चाहिए।
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