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अत्याचार निवारण अधिनियम में किए बदलाव को निरस्त करने की उठाई मांग

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हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के तमाम दलित समाजसेवी संगठनों का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल सोमवार को डॉ. बीआर अंबेडकर सोशल वालंटियर आर्गेनाइजेशन के प्रदेश अध्यक्ष संजीव नागवन की अध्यक्षता में उपायुक्त से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। जिसमें राष्ट्रपति से मांग की गई कि सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले द्वारा जो अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में बदलाव किया गया है, उसे शीघ्र प्रभाव से निरस्त किया जाए। उन्होंने कहा कि न्यायालय के इस फैसले से यह कानून निष्प्रभावी और कमजोर हुआ है। जिसके परिणाम स्वरूप दलित समाज पर अत्याचार की घटनाओं में बढ़ोतरी होगी।
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उन्होंने मांग की कि केंद्रीय कार्यालय में जितना भी बैकलॉग है, उसे विशेष भर्ती अभियान द्वारा भरा जाए। दलित संगठनों ने राष्ट्रपति से मांग उठाई कि अनुसूचित जाति, जनजाति अथवा पिछड़ा वर्ग अल्पसंख्यक वर्ग के संवैधानिक अधिकार का दायित्व प्रदेश सरकारों को सुनिश्चित किया जाए। इस मौके पर दलित महासभा से संजय कुमार, अनुसूचित जाति, जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग युवा कल्याण संगठन से राकेश कुमार, राजकुमार, पवन शाह, चुन्नीलाल, मोनू कुमार, सफल डोगर, उत्तम चंद, सुनील कुमार, जितेंद्र कुमार, सनी कुमार, अशोक और सुनील ने भाग लिया।
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