हमीरपुर। नगर परिषद हमीरपुर में वित्तीय अनियमितता की करवाई गई मजिस्ट्रेट जांच के पांच माह बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। भाजयुमो हमीरपुर के पदाधिकारियों ने बीते साल उपायुक्त हमीरपुर के पास नगर परिषद हमीरपुर में वित्तीय अनियमितता की शिकायत की थी। इस शिकायत पर उपायुक्त हमीरपुर ने एसडीएम को मामले की जांच के आदेश दिए थे। एसडीएम ने नगर परिषद हमीरपुर का रिकॉर्ड कब्जे में लेकर अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा था कि आरोप सही हैं और नगर परिषद में सामग्री की खरीद में नियमों की अवहेलना हुई है। एसडीएम की इस जांच रिपोर्ट को आधार बनाकर उपायुक्त ने पुलिस अधीक्षक हमीरपुर को आगामी कार्रवाई के आदेश दिए थे। जिस पर पुलिस थाना हमीरपुर में भादंसं की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ।
जांच रिपोर्ट और पुलिस में केस दर्ज हुए पांच माह बीत जाने के बाद भी पुलिस नगर परिषद के आरोपी पदाधिकारियों पर हाथ डालने से कतरा रही है। इसके पीछे की वजह कुछ और भी हो सकती हैं। जैसे की नगर परिषद हमीरपुर में भाजपा समर्थित नप अध्यक्ष और उपाध्यक्ष समेत दो तिहाई पार्षदों का नप पर कब्जा होना। जाहिर सी बात है कि जब पुलिस कार्रवाई करेगी तो इसकी आंच वित्तीय अनियमितता के मामले से जुड़े कई अन्य लोगों तक आएगी। पांच माह से ठंडे बस्ते में पड़ी पुलिस विभाग की कार्रवाई से लोगों ने अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। लोगों ने आशंका जताई है कि कहीं मजिस्ट्रेट जांच को दबाने के प्रयास तो नहीं हो रहे हैं? उधर, एसडीएम हमीरपुर अरिंदम चौधरी ने कहा कि उन्हें जांच के आदेश दिए गए थे। जांच रिपोर्ट पूरी कर पुलिस में नगर परिषद के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज है, लेकिन आगामी कार्रवाई पुलिस को ही करनी है।