हमीरपुर। सीटू जिला कमेटी हमीरपुर ने केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर हजारों मजदूरों ने जिला मुख्यालय हमीरपुर में जोरदार प्रदर्शन किया और रैली निकाली। ठंड के बावजूद भोटा चौक में हजारों की संख्या में कर्मचारी और मजदूर इकट्ठे हुए और बाजार से रैली निकालते हुए गांधी चौक पर विशाल सभा की। रैली को सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर सिंह ठाकुर, जिला सचिव जोगिंद्र कुमार, अध्यक्ष प्रताप राणा, रंजन शर्मा, डीवाईएफआई के प्रदेश अध्यक्ष अनिल मनकोटिया, धर्म सिंह, आंगनबाड़ी जिला सचिव राजकुमारी, मिड-डे मील वर्कर यूनियन के अध्यक्ष रतन चंद, आशा वर्कर यूनियन के सचिव पूजा, आउटसोर्स वर्कर्स यूनियन के राज्य अध्यक्ष यशपाल सहित मंजना वर्मा, सुरेश, विवेक राणा ने संबोधित किया।
गांधी चौक में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। कहा कि महंगाई से आम आदमी का जीना मुश्किल हो गया है। जबकि, मजदूरों की मजदूरी में बढ़ोतरी न के बराबर है। देशभर में रोजगार के अवसर खत्म हो रहे हैं। नोटबंदी के कारण 70 लाख से ज्यादा मजदूरों को रोजगार चला गया और करीब 2 लाख 34 हजार उद्योग धंधे बंद हो गए। केंद्र सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन, प्रोविडेंट फंड, ईएसआई, मातृत्व लाभ, मेडिकल लाभ पर भी मजदूर विरोधी परिवर्तन करने का प्रस्ताव पारित किया है। श्रम कानूनों को बदला जा रहा है, जिसका मजदूर वर्ग कड़ा विरोध करता है। यह लाभ और श्रम कानून मजदूरों ने लंबे संघर्षों के बाद हासिल किए हैं। मजदूरों और कर्मचारियों के लिए बने फंड 24,00,000 करोड़ रुपये को सट्टा बाजार में लगाकर उद्योगपतियों को सौंपा जा रहा है। यह मजदूरों और कर्मचारियों के जीवन भर की कमाई को ही दांव पर लगाने वाला कदम है। केंद्र सरकार ने रक्षा, रक्षा उत्पादन समेत सरकारी क्षेत्र के बैंकों, बीएसएनएल, बीमा, रेलवे, तेल, बिजली, ऊर्जा, कोयला, बंदरगाहों, स्टील, हवाई अड्डों समेत नवरत्न कंपनियों को भी बेचने का काम किया है। केंद्र सरकार योजना कर्मियों, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, आशा वर्कर के बजट में भी कटौती कर रही है और अब इसे और कमजोर किया जा रहा है। सीटू की मांग है कि आंगनबाड़ी वर्कर्स, मिड-डे मील वर्कर्स और आशा वर्कर को सरकारी कर्मचारी बनाया जाए। मोदी सरकार ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भी अब विदेशी कंपनियों के हवाले कर देना चाहती है। इससे करोड़ों लोगों की आजीविका पर असर पड़ने वाला है। दूसरी तरफ मनरेगा के बजट में लगातार कटौती की जा रही है और यह बजट पिछले 4 सालों के न्यूनतम स्तर तक पहुंच गया है, जिसके चलते मनरेगा में काम नहीं मिल रहा।
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मजदूरों की मुख्य मांगें इस प्रकार से हैं:
1. मजदूरों का न्यूनतम वेतन सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार 18000 रुपये करना।
2. ठेकेदारी प्रथा, आउटसोर्स प्रणाली बंद करना और एक समान काम का एक समान वेतन देना।
3. डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस पर टैक्स कम किए जाएं और अनाज में सट्टा बाजारी बंद की जाए।
4. मनरेगा में 120 दिन का काम दो और न्यूनतम वेतन दो।
5. श्रम कानूनों से छेड़खानी बंद करो और इन्हें सख्ती से लागू करो।
6. मिड डे मील, आशा वर्कर्स व आंगनबाड़ी वर्कर्स को 44वें श्रम सम्मेलन के मुताबिक सरकारी कर्मचारी घोषित करना और सरकारी कर्मचारियों की सुविधाएं देना।
7. यूनियन का पंजीकरण सरल किया जाए और 1 महीने के अंदर यूनियन का पंजीकरण संभव हो।
8. मनरेगा मजदूरों को केंद्र सरकार का न्यूनतम वेतन दिया जाए।