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आचार्य वर्मा को मंत्रालय ने प्रदान किया कॉपीराइट

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हमीरपुर। पर्यावरणविद आचार्य रतन लाल वर्मा के प्रकाशित निष्कर्षों को भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के औद्योगिक नीति पालिसी एवं प्रमोशन विभाग ने कॉपी राइट प्रदान किया है। मंत्रालय ने पर्यावरण समाज एवं नया शोध इन्वायरमेंट सोसायटी एंड मॉडर्न रिसर्च के क्षेत्र में किए गए कार्य के लिए यह कॉपी राइट प्रदान किया है। आचार्य वर्मा हमीरपुर के वार्ड नंबर पांच के रहने वाले हैं और समय-समय पर पर्यावरण और जंगली जीव जंतुओं के संरक्षण पर अपनी पुस्तकें प्रकाशित कर चुके हैं।
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वर्ष 2004 को रतन लाल वर्मा ने अपने शोध निष्कर्ष में बताया था कि ध्रुवीय बर्फ के पिघलने से पृथ्वी का संतुलन प्रभावित होगा, विश्व का समय और ऋतुएं प्रभावित होंगी। जिसे पांच वर्ष बाद लंदन के हवाले से वर्ष 2009 में शोधकर्ताओं ने बताया कि दक्षिणी ध्रुव की बर्फ पिघलने में पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण क्षमता बदलेगी और अंतरिक्ष में पृथ्वी का अपनी धुरी का चक्कर लगाना प्रभावित होगा। इसके साथ ही वर्मा ने मानव के अस्तित्व को लेकर भी शोध निष्कर्ष का प्रकाशन किया। इसके अलावा वर्तमान 21वीं शताब्दी के प्राकृतिक आपदाओं की शताब्दी बनने का शोध निष्कर्ष, वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार युवा कहे जाने वाले हिमालय पर्वत के वर्णों को तोड़ते हुए उसे समय से पहले बूढ़ा होने का शोध समेत अन्य शोध निष्कर्षों का प्रकाशन किया है।
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