हमीरपुर। मटौर से लेकर मट्टनसिद्ध हमीरपुर तक 80 किलोमीटर नेशनल हाइवे पर निकासी नालियां अवरुद्ध होने से बरसात के मौसम में यह मार्ग नहर की तरह बन गया है। भूस्खलन से निकासी नालियां बंद हैं और सड़क के किनारे झाड़ियां उग आई हैं। सड़क पर बरसात का पानी खड़ा होने से टारिंग को भारी नुकसान पहुंच रहा है। एनएचएआई ने अभी दो सप्ताह पूर्व ही इस मार्ग पर करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से टारिंग और पेचवर्क करवाया है। पूर्व में यह मार्ग एनएच विभाग के पास था। लेकिन, वर्तमान में इस मार्ग की मरम्मत और देखरेख का कार्य राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के पास है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मटौर से शिमला 220 किलोमीटर मार्ग को फोरलेन बनाने की घोषणा की थी। जिसके बाद हमीरपुर के कृष्णानगर में फोरलेन का कार्यालय खोला गया, जहां पर परियोजना निदेशक समेत अन्य तकनीकी स्टाफ मौजूद है। बावजूद इसके मार्ग पर निकासी नालियों और मार्ग की बदतर हालत एनएचएआई के अधिकारियों को नहीं दिख रही। मंगलवार को भारी बारिश के कारण बरसात का सारा पानी सड़क पर बहता नजर आया। इस मार्ग पर गुजरने वाले वाहनों को सड़क पर पानी के कारण खासा नुकसान उठाना पड़ रह है। बसों के भीतर पानी घुस गया। जबकि दोपहिया वाहन पानी में तैरते नजर आए। सुशील शर्मा, प्रदीप शर्मा, राहुल धीमान, विनोद ठाकुर, प्रदीप ठाकुर और अरुण शर्मा ने कहा कि एनएच प्राधिकरण निकासी नालियों की मरम्मत नहीं करवा पा रहा। नादौन के तहत आते रंगस, ज्वालामुखी और रानीताल में एनएच के बुरे हाल हैं। कभी भी अनहोनी हो सकती है। उधर, फोरलेन के परियोजना निदेशक योगेश रावत ने कहा कि शीघ्र ही निकासी नालियों और भूस्खलन से सड़कों पर गिरे मलबे को हटाने के लिए टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे।