अमर उजाला ब्यूरो
बड़सर (हमीरपुर)। राजकीय महाविद्यालय बड़सर में टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ के करीब 30 पद खाली चल रहे हैं। वर्ष 2019-20 का नया सत्र एक जुलाई से आरंभ हो चुका है, लेकिन अभी भी कॉलेज में प्राध्यापकों, लाइब्रेरियन, लिपिक, लैब अटेंडेंट के पदों को नहीं भरा गया है। हालांकि, सरकार की ओर से शिक्षा में गुणवत्ता के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग ही है। बड़सर डिग्री कॉलेज में स्टाफ के पद अरसे से खाली चल रहे हैं। ऐसे में छात्रों को कॉलेज में उचित सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। खाली पदों में गणित प्राध्यापक 2, अंग्रेजी प्राध्यापक 1, पुस्तकालय अधीक्षक सहित कुल चार पद, लैबों में सीनियर लैब अटेंडेंट एक, जूनियर लैब अटेंडेंट 3 और लैब अटेंडेंट के 4 पद खाली चल रहे हैं। इसके अलावा लिपिक और अन्य के 7 पद अरसे से खाली चल रहे हैं।
कॉलेज में खाली पड़े पदों को सरकार की ओर से अरसे से न भरना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे राजनीतिक भेदभाव से भी देख रहे हैं। कॉलेज में सबसे ज्यादा परेशानी गणित और अंग्रेजी विषय के छात्रों सहित लाइब्रेरी में पढ़ाई करने वाले छात्रों को आ रही है। छात्र संगठनों एनएसयूआई, एबीवीपी और एसएफआई ने कॉलेज में खाली पड़े पदों को जल्द भरने की मांग की है। पीटीए कमेटी भी लंबे समय से खाली पदों को भरने के लिए सरकार से मांग कर रही है, लेकिन आज तक खाली पद भरे नहीं गए हैं। छात्रों में प्रदीप कुमार, वीरेंद्र कुमार, सीमा, अपूर्वा, अंकित कुमार, विनोद कुमार, अरविंद आदि ने कॉलेज में रिक्त पदों को भरने की मांग की है। उधर, इस संबंध में प्रधानाचार्य अश्वनी शर्मा का कहना है कि कॉलेज में खाली पदों के बारे में विभाग को अवगत करवाया गया है।