हमीरपुर। लाखों रुपये खर्च कर जिला मुख्यालय हमीरपुर में शहीदों के लिए समर्पित स्मारक पर केवल खंभा और लोकार्पण पट्टिका ही शेष रह गई है। इस स्मारक की अनदेखी के कारण शहीदों के परिवारों और पूर्व सैनिकों में भारी रोष है। जिला हमीरपुर में हर दूसरा परिवार सेना में है। यहां शहीदों की शहादत को यादगार बनाने के लिए ढाई साल पूर्व जिला मुख्यालय में एक स्मारक का निर्माण किया गया। लेकिन वर्तमान में इस स्मारक की सुध लेने वाला कोई नहीं है। 8 नवंबर 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाल के खेल परिसर में राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान देने वाले शहीदों के लिए समर्पित एक स्मारक का लोकार्पण किया था।
जिला प्रशासन ने इस स्मारक के निर्माण पर सरकारी खजाने से एक बड़ी रकम खर्च की थी। स्मारक पर करीब 135 फीट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज और मंच पर एलईडी लाइटें लगाई गईं। लेकिन यह राष्ट्रीय ध्वज कुछ दिन बाद ही फट गया। जिसके बाद करीब पांच बार राष्ट्रीय ध्वज को बदला जा चुका है लेकिन वर्तमान में खंभा ही दिख रहा है, और राष्ट्रीय ध्वज गायब है। स्मारक के मंच पर लगाई लाइटें भी खराब हो चुकी हैं। स्मारक के मंच पर केवल उद्घाटन पट्टिका ही रह गई है। खेल मैदान में नियमित सफाई न होने से कूड़ा-कर्कट फैला हुआ है। नालियों में गंदा पानी जमा है। स्थानीय लोगों सुशील शर्मा, विनोद ठाकुर, प्रदीप सिंह, राहुल और ओम प्रकाश ने कहा कि हमीरपुर वीरों की भूमि हैं। शहीद स्मारक पर राष्ट्रीय ध्वज समेत लाइटों की जिला प्रशासन उचित व्यवस्था करे। उधर, एसडीएम हमीरपुर शशिपाल नेगी ने बताया कि इस मामले को उपायुक्त हमीरपुर के ध्यान में लाया जाएगा।