फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

न्यायालय के निर्णय को लागू न करने पर संघ में सरकार के प्रति रोष

विज्ञापन
विज्ञापन
हमीरपुर। प्रदेश पदोन्नत स्कूल प्रवक्ता संघ ने पूर्व सैनिकों की वरिष्ठता से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को लागू करने से पलटने पर सरकार के प्रति गहरा रोष व्यक्त किया है। संघ की कोर कमेटी के अध्यक्ष केवल ठाकुर एवं प्रदेश महासचिव यशवीर जंवाल ने कहा कि वरिष्ठता की इस लड़ाई को अध्यापक संगठन 1992 से न्यायालय में लड़ रहे हैं। 25 वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद अगस्त 2017 में सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व सैनिकों को सिविल सेवा में दी जाने वाली इस वरिष्ठता को असंवैधानिक ठहराया। प्रदेश सरकार ने 27 जुलाई 2018 को 300 के करीब पूर्व सैनिकों की संशोधित वरिष्ठता सूची जारी करके इस निर्णय को आंशिक रूप से लागू करते हुए 300 पूर्व सैनिकों की वरिष्ठता सूची को 29 दिसंबर 2008 की स्थिति में रखा था। उक्त तिथि को ही उच्च न्यायालय को इस वरिष्ठता को असंवैधानिक ठहराया था।
विज्ञापन

इसी असंवैधानिक वरिष्ठता का परिणाम है कि आज शिक्षा विभाग में 80 से अधिक उप शिक्षा निदेशक एवं 65 से अधिक प्रधानाचार्य पूर्व सैनिक कोटे के हैं। आज शिक्षा विभाग में स्थिति यह है कि 1994 का टीजीटी 25 वर्ष की सेवा के बाद तथा 1997 का प्रवक्ता 20 वर्ष बाद भी उसी पद पर कार्यरत है। हालात ऐसे हैं कि गुरु आज उसी पद पर आसीन है, जबकि उसका पूर्व सैनिक छात्र प्रधानाचार्य पद पर आसीन है। इस संदर्भ में संघ के पदाधिकारियों प्रधान जिला बिलासपुर संजीव शर्मा, प्रधान जिला कांगड़ा प्रदीप धीमान, प्रधान जिला मंडी कमल किशोर शर्मा, प्रधान कुल्लू मनोज शर्मा, प्रदेश मीडिया प्रभारी विकास धीमान एवं अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश सरकार चंद पूर्व सैनिकों के बहकावे में न आकर सर्वोच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक निर्णय को लागू करे। पूरे देश में सिर्फ हिमाचल प्रदेश में ही दी जाने वाली पूर्व सैनिकों की इस वरिष्ठता को न्यायालय के निर्णय के अनुसार समाप्त किया जाए। अन्यथा उनका संघ अन्य अध्यापक संगठनों से मिलकर शीघ्र ही इसके विरोध की रणनीति बनाने पर मजबूर होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें