हमीरपुर। डीजीपी एसआर मरड़ी ने पुलिस अधिकारियों को प्रदेश में नशे और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सख्ती से उचित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। वीरवार को हमीरपुर के एनआईटी सभागार में आयोजित क्राइम बैठक में मरड़ी ने कहा कि अपने क्षेत्र में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखना संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक, डीएसपी और एसएचओ की जिम्मेवारी है। बैठक में पुलिस महानिदेशक केंद्रीय रेंज एन वेणु गोपाल के अलावा एसपी हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी, कुल्लू और लाहुल स्पीति के पुलिस अधीक्षक, उप पुलिस अधीक्षक और थाना प्रभारियों ने भाग लिया।
थानों के अलावा अब पंचायत स्तर पर नशा निवारण समितियां गठित होंगी। डीजीपी ने कहा कि प्रदेश में अपराध के मामलों को सुलझाने के लिए 28656 सीसीटीवी स्थापित किए गए हैं। इसमें से कई सीसीटीवी ऐसे हैं, जिनसे वाहनों की नंबर प्लेट आसानी से पढ़ी जा सकती है। इस साल हत्या के 16 मामले दर्ज हुए हैं, जबकि बीते साल यह 14 थे। सामान्य मौतों की तुलना में सड़क हादसों में 10 से 12 गुणा अधिक मौतें हो रही हैं। हिमाचल पुलिस आपातकालीन प्रतिक्रिया समर्थन 112 नंबर लांच करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इसके साथ ही प्रदेश में ई-चालान सुविधा लागू है। स्नातक उत्तीर्ण कांस्टेबल को चालान और तीन साल से कम सजा वाले मामले की तफ्तीश की शक्तियां प्रदान की गई हैं। प्रदेश पुलिस में साइबर सेल स्थापित किया जा रहा है। इसके अलावा नार्को टेस्ट को भी प्रदेश के भीतर शुरू करने के लिए उचित कदम उठाए जा रहे हैं। इस मौके पर एसपी हमीरपुर अर्जित सेन ठाकुर, डीएसपी रेणु शर्मा, एसएचओ सदर संजीव गौतम, महेंद्र परमार, कुलवंत सिंह समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
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जनता में विश्वास के संदर्भ में हिमाचल पुलिस दूसरे पायदान पर
हमीरपुर। कॉमन कॉज गैर राजनीतिक संगठन ने सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटी के साथ मिलकर भारत में पुलिस व्यवस्था की स्थिति में अध्ययन रिपोर्ट प्रकाशित की है। जिसके मुताबिक जनता के प्रति दृष्टिकोण और पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों के प्रति जनता के विश्वास के संदर्भ में हिमाचल पुलिस दूसरे पायदान पर है। आपराधिक मामलों का निपटारा करने में तीसरे स्थान पर, पुलिस की कार्यप्रणाली से जनता की संतुष्टि के सूचकांक में दूसरे स्थान पर, जनता पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों से भयभीत नहीं के मामले में पहले स्थान पर है।