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्री प्राइमरी कक्षा; कम अध्यापकों की संख्या वाले स्कूलों में आफत

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हमीरपुर। जिला हमीरपुर के करीब 266 प्राथमिक स्कूलों में अक्तूबर माह से नर्सरी कक्षाएं शुरू होने वाली हैं, मगर बीच सत्र में शुरू होने जा रही यह योजना फिलहाल उन स्कूलों में शिक्षकों के गले की फांस बनने वाली है जिनमें एक या महज 2 अध्यापक हैं। अब इन शिक्षकों के लिए 6 कक्षाएं संभालना और पढ़ाना चुनौतीपूर्ण रहेगा। नर्सरी कक्षा चलाने के लिए मूलभूत सामग्री खरीदने के लिए डाइट हमीरपुर से बजट मिल भी सकता है, मगर इस कक्षा के कम उम्र के बच्चों के लिए न कोई केयरटेकर होगा और न ही कोई अलग शिक्षक। हमीरपुर शिक्षा खंड के 52, बिझड़ी खंड के 55, सुजानपुर के 33, भोरंज के 48, नादौन के 41 और गलोड़ के 37 स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं शुरू होने वाली हैं।
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स्कूलों में एक तरफ जलवाहकों के पद रिक्त पड़े होने से इतने छोटे बच्चों की देखभाल शिक्षकों के लिए मुश्किल होगी। वहीं यह काम करने के लिए एनटीटी शिक्षक भी विभाग फिलहाल नियुक्त नहीं करेगा। जबकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी इसके लिए कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं। इस तरह सारी नर्सरी कक्षाएं प्राथमिक शिक्षकों को चलानी होंगी। बीच सत्र में ये दाखिले करना और इनको पोषाहार की व्यवस्था करना बड़ी मुश्किल चुनौती बन चुका है। सरकार ने चुनावों से पहले नर्सरी का जिम्मा शिक्षकों के सिर डाल तो दिया लेकिन, इसकी पर्याप्त तैयारियां नहीं हो सकी हैं। शिक्षकों को प्रशिक्षण तो दिया जा रहा है लेकिन बैठने, खाने और पढ़ाने की व्यवस्था की तैयारियां अधर में हैं। ऐसे में जब अनेकों स्कूल पहले ही रिक्त पदों और शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं तो नर्सरी के लिए कितना प्रयास कर पाएंगे, ये चिंता का विषय बना हुआ है। इस संबंध में उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा देशराज भरवाल का कहना है कि अक्तूबर माह में अभी प्री-प्राइमरी कार्यक्रम लांच होगा। इसकी लांचिंग के दौरान पूरी रूपरेखा का पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि कम अध्यापकों वाले स्कूलों की पूर्ति नए भरे जाने वाले पदों से की जाएगी। बच्चों को सरकार की ओर से हर सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।
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