बिझड़ी/नादौन(हमीरपुर)। जिला में मौजूद दोनों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं चरमराई हुई है। जिला हमीरपुर में केवल दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें से एक बिझड़ी और दूसरा गलोड़ कस्बा में हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिझड़ी को हाल ही में पीएचसी से सीएचसी का दर्जा मिला है। अस्पताल को सीएचसी का दर्जा तो दे दिया गया, लेकिन यहां पर आने वाले मरीजों को उचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही है। अस्पताल में चिकित्सकों के 5 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में यहां पर 2 ही चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। तीसरा डॉक्टर यहां से डेपुटेशन पर भोटा जाता है।
अस्पताल में लोगों को टेस्ट आदि की सुविधाओं के लिए लैब तो है, लेकिन लैब तकनीशियन नहीं है। इस कारण लोगों को अपने स्वास्थ्य संबंधी टेस्ट निजी क्लीनिकों में करवाने को मजबूर होना पड़ता है। इस कारण लोगों का आर्थिक नुकसान अधिक हो रहा है। अस्पताल में डेंटल विंग है, लेकिन डेंटल विशेषज्ञ का पद खाली है। इसके अलावा अस्पताल में एक्स-रे भी नहीं होते हैं। एक्स-रे करवाने के लिए लोगों को बाहरी लैबों का सहारा लेना पड़ता है। अस्पताल में मौजूद डॉ. अनुकृति और डा. शिवानी ने कहा कि मरीजों को बेहतर उपचार देने के लिए तत्पर हैं। जितना भी स्टाफ और उपकरण उपलब्ध हैं, उनके हिसाब से मरीजों का इलाज किया जाता है। अस्पताल में प्रतिदिन 70 से 80 की ओपीडी होती है। शाम 4 बजे के बाद अस्पताल बंद हो जाता है, लेकिन डॉक्टरों के आवास साथ में होने के चलते मरीजों को रात के समय भी मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध होती हैं।
वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गलोड़ में चार चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। इनमें से अरसे से रिक्त चल रहे चिकित्सक के एक पद पर शुक्रवार को तैनाती हो गई है। लेकिन अस्पताल में लैब तकनीशियन न होने के कारण मरीजों को टेस्ट आदि करवाने में बाहर की लैबों का रुख करना पड़ता है। हालांकि नादौन अस्पताल से डेपुटेशन पर एक लैब तकनीशियन अस्पताल के लिए लगाया गया है, लेकिन तकनीशियन की स्थायी तैनाती न होने से परेशानी होती है। इसके अलावा अस्पताल में एक्स-रे की सुविधा नहीं है। अल्ट्रासाउंड भी माह में दो बार ही होता है। बीएमओ गलोड़ एसके गौतम का कहना है कि अस्पताल में पड़े रिक्त पदों के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है। अस्पताल में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही हैं।
सामुदायिक अस्पताल स्तर की मिले सुविधाएं
बिझड़ी निवासी अनूप कुमार का कहना है कि मात्र सामुदायिक अस्पताल का दर्जा देने से लोगों को लाभ नहीं मिलेगा। अस्पताल में सामुदायिक अस्पताल की तरह सुविधाएं भी होनी चाहिए। बिझड़ी में लोगों को सामुदायिक अस्पताल स्तर की सुविधाएं नहीं मिल रही है।
लैब तकनीशियन के पद भरे जाएं
ददवीं निवासी सुनील दत्त का कहना है कि अस्पताल में लैब तकनीशियन का पद खाली है। जब अस्पताल में विभिन्न टेस्टों के लिए लैब है और कर्मचारी नहीं है तो इसका कोई भी लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। लोग निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में टेस्ट करवाने को मजबूर हैं।
चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरा जाए
बुढान निवासी राकेश बबली का कहना है कि अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के मद्देनजर रिक्त पड़े चिकित्सकों के पदों को भरा जाना चाहिए। इसके साथ ही अस्पताल में रिक्त पड़े पैरामेडिकल स्टाफ के पदों पर भी कर्मचारियों की तैनाती की जानी चाहिए। खाली पदों के भरने से लोगों को उच्च स्तर की स्वास्थ्य सुविधाएं घर के नजदीक ही मिल सकेंगी।
अस्पताल में 24 घंटे मिले सेवाएं
टांगर निवासी विजय का कहना है कि कई बार शाम के समय अस्पताल में चिकित्सक नहीं मिल पाते हैं। इस कारण परेशानी होती है। लोगों को निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जाना पड़ता है। लोगों ने अस्पताल में 24 घंटे सेवाएं देने की मांग की है।