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Hamirpur (Himachal) News: बाईपास निर्माण के बीच आ रहे 151 पेड़, वन विभाग की लेनी पड़ेगी मंजूरी

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रंगस (हमीरपुर)। निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज जोलसप्पड़ के समीप बनने वाले बाईपास के अंतर्गत आने वाली वन विभाग की 18 कनाल भूमि में पेड़ों की संख्या 151 के करीब है। अब लोक निर्माण विभाग को एफआरए के बजाय एफसीए केस बनाकर फाइल वन विभाग की अनुमति के लिए भेजनी पड़ेगी। इसकी वजह से निर्माण कार्य शुरू करने में थोड़ी देरी भी हो सकती है। बुधवार को लोक निर्माण विभाग और वन विभाग की टीम ने संयुक्त रूप में डीपीएफ (डेमार्केटेड प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट) लैंड का निरीक्षण किया।
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इसके बाद पेड़ों की संख्या का पता चला। बाईपास निर्माण के लिए वन विभाग की भूमि में कम पेड़ यानी 75 के करीब पेड़ आते तो एफआरए यानी वन अधिकार नियम के तहत ही बाईपास निर्माण के लिए वन विभाग की अनुमति मिल सकती थी। अब वन संरक्षण अधिनियम के तहत मंजूरी लेनी पड़ेगी। बाईपास के निर्माण के लिए आने वाली वन विभाग की भूमि एक हेक्टेयर से कम यानी 18 कनाल है लेकिन पेड़ 75 के बजाय 151 आ रहे हैं। इसलिए एफसीए केस के तहत ही वन विभाग की अनुमति मिलना संभव है। इस 1200 मीटर लंबे बाईपास के निर्माण के लिए जहां 600 मीटर के करीब स्थानीय लोगों की निजी भूमि आ रही है, वहीं 495 मीटर डीपीएफ (डेमार्केटेड प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट) लैंड और 105 मीटर यूपीएफ यानी अनप्रोटेक्टेड फॉरेस्ट लैंड आएगी।
इसलिए वन विभाग की अनुमति लोक निर्माण विभाग को अनिवार्य रूप से लेनी पड़ेगी। वन विभाग की ओर से जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र के बाद ही बाईपास का निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है। वन मंडल अधिकारी हमीरपुर राकेश कुमार ने कहा कि बाईपास निर्माण के तहत आने वाली भूमि तो एक हेक्टेयर से कम 18 कनाल ही थी लेकिन पेड़ ज्यादा होने की वजह से अब अनुमति के लिए एफसीए केस बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजना पड़ेगा। वहां से अनुमति मिलने के बाद ही पेड़ों को काटने के साथ-साथ अन्य निर्माण कार्य शुरू हो सकता है। इसलिए तब तक लोक निर्माण विभाग को डीपीएफ एरिया में फिलहाल कोई भी कार्य नहीं करना है। अनुमति मिलने के बाद ही वन विभाग की भूमि पर किसी भी तरह का निर्माण किया जा सकता है। इस मौके पर लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता दीपक कपिल, सहायक अभियंता देशराज भाटिया, कनिष्ठ अभियंता सुशील व वन परिक्षेत्र अधिकारी नादौन राजीव सूद के अलावा राजस्व विभाग की ओर से सर्कल कानूनगो व पटवारी भी मौजूद रहे।
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