नादौन (हमीरपुर)। पुलिस थाना नादौन के तहत टिल्लू जंगल में मंगलवार दोपहर करीब एक बजे अज्ञात शिकारियों ने अपनी बंदूक से गोलियां चलाकर एक सांभर को मौत के घाट उतार दिया। शिकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि बेखौफ होकर दिनदहाड़े जंगली जानवरों को अपनी बंदूक की गोलियों का शिकार बना रहे हैं। मंगलवार दोपहर शिकारियों की ओर से चलाई गई गोली से बुरी तरह घायल हुआ एक सांभर स्थानीय एसडीएम प्रशासनिक कॉलोनी में अपनी जान बचाने के लिए घुस आया। घटनास्थल पर इकट्ठे हुए ग्रामीणों ने इस घायल सांभर की मरहम पट्टी भी करने की कोशिश की, परंतु गोलियों की पीड़ा को सहन न करते हुए सांभर ने दम तोड़ दिया। ग्रामीणों ने गोलियां चलने की आवाज भी सुनीं और सांभर के पेट में तीन से चार गोलियां लगने के निशान भी हैं। लोगों ने इस घटना की जानकारी वन विभाग के अधिकारियों और पुलिस प्रशासन को दी।
मौके पर पहुंचे वन विभाग व पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया। वन विभाग के कर्मचारियों ने सांभर के शव को कब्जे में लेकर उसका पोस्टमार्टम करवाया। ग्रामीणों का कहना है कि निकट ही गांव से सटे जंगल में शिकारी दिनदहाड़े जंगली जानवरों पर गोलियां चलाते रहते हैं और ऐसे में इस क्षेत्र में घनी आबादी होने के कारण कभी भी किसी को गोली से घायल होने का भय बना रहता है। उन्होंने कहा कि शिकारी जंगली जानवरों खरगोश, सांभर, कबूतर, मोर आदि को भी अपना शिकार बना कर पर्यावरण को हानि पहुंचा रहे हैं। इस संबंध में रेंज ऑफिसर वन विभाग सुखदेव सिंह ने बताया कि सांभर का पोस्टमार्टम करवा दिया गया और विभाग द्वारा इस घटना पर नादौन थाना में अज्ञात शिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी गई है। विभागीय कर्मचारियों को इस वन बीट में शिकारियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दे दिए गए हैं। वहीं थाना प्रभारी नादौन महेंद्र सिंह परमार का कहना है कि पुलिस ने मामला दर्ज करके अज्ञात शिकारियों की धरपकड़ तेज कर दी है।
झनियारी और सुजानपुर में शिकारियों की गोलियों से लोग हो चुके हैं घायल
जिला मुख्यालय हमीरपुर से छह किलोमीटर दूर झनियारी में भी दो माह पूर्व एक शिकारी ने गोलियां चलाई थीं। जिससे जंगल के साथ में रहने वाले प्रवासियों के परिवार की दो बेटियां बंदूक से निकले छर्रों से घायल हो चुकी हैं। एक घायल लड़की को हमीरपुर से पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया था। जबकि सुजानपुर में लोहड़ी को घर आए राजस्थान में नौकरी करने वाले दो युवक भी जंगल में शिकार के दौरान गोली चलने से घायल हो चुके हैं। जिनमें से एक का इलाज चंडीगढ़ पीजीआई में चल रहा है।