हमीरपुर। जिला की अस्सी फीसदी निजी स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर नहीं हैं। ऐसे में स्कूल बस चालक निर्धारित गति सीमा से अधिक गति में बसों को दौड़ा रहे हैं। वहीं अधिकतर स्कूल बस ड्राइवर बिना सीट बेल्ट के बसों को चला रहे हैं। कई स्कूल बसों में तो बच्चे खड़े होकर सफर करने को मजबूर हैं। नूरपुर बस हादसे के बाद भी निजी स्कूल प्रबंधक सबक नहीं ले रहे हैं। हादसे के कुछ दिन तक तो निजी स्कूलों में ओवरलोडिंग आदि देखने को नहीं मिली, लेकिन अब दोबारा से कई बसों में ओवरलोडिंग शुरू है। इसके अलावा कई स्कूल बच्चों को निजी वाहनों में भेज रहे हैं। निजी वाहनों में न तो रंग पीला है और न ही स्पीड गवर्नर समेत अन्य मापदंड पूरा करते हैं।
निजी बसों में अग्निशमन यंत्र और खिड़कियों के शीशों पर ग्रिल भी नहीं लगाए गए हैं। डेढ़ सप्ताह पहले नूरपुर में हुए बस हादसे और वीरवार को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में हुए स्कूल बस हादसे से भी निजी स्कूल प्रबंधक सबक नहीं ले रहे हैं। चालकों द्वारा नियमों का उल्लंघन कर वाहन चलाए जा रहे हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। कई स्कूलों द्वारा बीच सड़क में गाड़ी खड़ी करके बच्चों को चढ़ाया और उतारा जा रहा है। आरटीओ प्रभात चौधरी का कहना है कि समय समय पर बसों और स्कूली गाड़ियों की चेकिंग की जा रही है। अगर बसों और गाड़ियों में ओवरलोडिंग हो रही है तो इस पर संबंधित स्कूल पर कार्रवाई की जाएगी। विभाग द्वारा जिलाभर में स्कूली बसों की चेकिंग की जाएगी। वहीं एसडीएम हमीरपुर अरिंदम चौधरी ने कहा कि एक हफ्ता तक चले निरीक्षण अभियान में जिला के 80 फीसदी स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर नहीं मिले। चालान काटने के साथ साथ एक हफ्ते में कमियों को पूरा करने के निर्देश दिए हैं। अब शीघ्र दोबारा निरीक्षण अभियान चलाकर नियमों को पूरा न करने वाले वाहनों को जब्त किया जाएगा।