हमीरपुर। प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ ने प्रदेश शिक्षा विभाग की ओर से खंड स्रोत समन्वयकों (बीआरसी) की नियुक्तियों के संदर्भ में बनाई गई पॉलिसी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। संघ के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष मनोज पाल सिंह परिहार ने कहा कि कूलिंग ऑफ पीरियड जो बीआरसी के लिए 3 वर्ष का है, तर्कसंगत नहीं है। बीआरसी जो सर्व शिक्षा अभियान का केंद्र बिंदु है, अपने काम को ठीक ढंग से समझ पाता है तो उसे तीन वर्ष के कूलिंग पीरियड में डालकर हटा दिया जाता है। इससे शिक्षा विभाग को एक परिपक्व और प्रशिक्षित सेवाओं से अपनी ही पॉलिसी के कारण नुकसान उठाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि इन नियुक्तियों की सरकार हर 3 वर्ष बाद समीक्षा करते हुए नए साक्षात्कार करें और योग्य व्यक्तियों का इस महत्वपूर्ण पद पर चयन करे। इसमें कोई बीआरसी अपना कार्य बनाए गए मापदंडों के अनुसार नहीं करता है तो उसके स्थान पर नई नियुक्ति की जा सकती है। मनोज ने कहा कि बीआरसी नियुक्ति सेवा शर्तों में 50 फीसदी अंकों और 50 वर्ष की आयु की शर्त भी उचित नहीं है। टीजीटी अध्यापकों को पदोन्नति में उपरोक्त शर्तों को कोई स्थान नहीं है तो इन नियुक्तियों में क्यों। इसके लिए अधिकतम आयु की शर्त को वापस लिया जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से आह्वान किया है कि वह किसी भी अध्यापक की खराब रिजल्ट के कारण वेतन वृद्धि न रोकें। खराब परीक्षा परिणाम के लिए अध्यापक को दोषी ठहराया जाना उचित नहीं है।