हमीरपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत काम करने वाले मजदूरों की अगर काम करते समय हार्टअटैक से मौत हो जाती है तो उन्हें किसी तरह का कोई मुआवजा सरकार की तरफ से नहीं मिलेगा। जबकि मनरेगा मजदूरों को काम करते समय कोई चोट लगती हैं तो मुफ्त इलाज की सुविधा प्रदान की जाती है। प्रदेश ग्रामीण विकास विभाग ने केंद्र सरकार के समक्ष हार्ट अटैक से मौत पर मुआवजे का मामला उठाया था।
इस पर केंद्र सरकार ने प्रदेश ग्रामीण विकास विभाग को चिट्ठी भेजकर स्पष्टीकरण भेज दिया है। केंद्र सरकार ने प्रदेश ग्रामीण विकास विभाग को भेजे स्पष्टीकरण में लिखा है कि मनरेगा के तहत काम करते हुए अगर किसी मजदूर की मौत हो जाए तो उन्हें सरकार की तरफ से कोई मुआवजा राशि प्रदान नहीं की जा सकती। केंद्र सरकार के इस जवाब पर सीटू और पंचायत प्रतिनिधियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। सीटू ने केंद्र सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। सीटू नेता एवं देई दा नौण पंचायत के प्रधान रंजन शर्मा, सीटू राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर सिंह ठाकुर, जिला सचिव जोगिंद्र कुमार और डीवाईएफआई के राज्य अध्यक्ष अनिल मनकोटिया ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां मजदूर विरोधी रही हैं। इस फैसले का कड़ा विरोध किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा।