हमीरपुर। भारत सरकार कागजों में गरीब परिवारों के उत्थान के लिए कई योजनाएं बनाती रही है लेकिन, धरातल पर इन योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों को कम ही मिलता है। जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन के तहत वर्ष 2005 में इंटेग्रेटिड हाउसिंग एंड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू हुआ। इस योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में भूमिहीनों के लिए आवास बनाए जाने थे। नगर परिषद हमीरपुर में भूमिहीन परिवारों के लिए आवास बनाने को हथली खड्ड किनारे पांच कनाल भूमि चिन्हित की गई। केंद्र से योजना के तहत 152 फ्लैट बनाने को साढ़े चार करोड़ का बजट भी मिला।
वर्ष 2010 में जमीन कम होने के चलते 152 में से 72 फ्लैटों का निर्माण कार्य शुरू हुआ जिसे हिमुडा ने वर्ष 2012 में पूरा कर दिया। योजना के तहत पहले निर्धन परिवारों को 25 हजार में फ्लैट मिलने थे लेकिन, लागत बढ़ने से तीन लाख रुपये में एक फ्लैट देने का निर्णय लिया गया। नगर परिषद ने निर्माण कार्य अधूरा होने का तर्क देकर फ्लैट लेने से इनकार कर दिया। नवंबर 2016 में 70 लाख रुपये का अतिरिक्त बजट हिमुडा को मिला। अब सोमवार को हिमुडा ने इन फ्लैटों का निर्माण कार्य पूरा कर चाबी नगर परिषद को सौंप दी है। लेकिन, नगर परिषद ने गत माह आयोजित बैठक में इन फ्लैटों को डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज हमीरपुर को देने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। नगर परिषद का कहना है कि निर्धन परिवारों ने इन फ्लैट को लेने से इनकार कर दिया है। जिसके चलते इसे अब मेडिकल कॉलेज को दिया जाएगा।
कोट
शहर के महज 18 लोगों ने ही किया आवेदन
हिमुडा ने 23 जुलाई को हथली खड्ड में गरीबों के लिए बनने वाले फ्लैटों का सारा कार्य करवाकर चाबी नगर परिषद को सौंप दी है। हिमुडा के मुताबिक प्रति फ्लैट इसकी लागत अब 5 लाख 6 हजार रुपये बन रही है। शहर के महज 18 लोगों ने इन फ्लैटों के लिए आवेदन किया है। जिसके चलते 72 में से 56 फ्लैट मेडिकल कॉलेज को सौंपने का प्रस्ताव नगर परिषद की पूर्व की बैठक में पारित हो चुका है।
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