हमीरपुर।
जिले में हुई जमीनी धांधलियों पर पहली विकेट गिर गई है। आने वाले समय में और तबादले की संभावना जताई जा रही है। प्रदेश सरकार ने तहसीलदार हमीरपुर का नादौन तबादला कर दिया है। उनकी जगह राजीव ठाकुर को दोबारा ज्वाइनिंग दी है। राजीव ठाकुर का विधानसभा चुनाव से पहले सितंबर 2017 को हमीरपुर से देहरा के लिए तबादला कर दिया गया था।
हालांकि यह स्पष्ट है कि हमीरपुर जिला मुख्यालय में सामने आए जमीनी फर्जीवाड़े की पटकथा आठ माह में नहीं लिखी गई। इसके तार बहुत पीछे से जुड़े हैं। कुछ लोग तहसीलदार की ट्रांसफर को भी रूटीन प्रक्रिया बता रहे हैं। लेकिन राजस्व विभाग ने बीते करीब पांच साल से एक सुनियोजित प्रक्रिया के तहत आधा दर्जन भूमि मालिकों की जमीन की पहले खानगी तकसीम की गई। इसके बाद जमीन पर 50 से अधिक प्लॉट बनाकर लोगों को बेच दिए गए।
करीब 60 करोड़ के भूमि सौदे के बाद इस जमीन पर कॉलोनी बसाने का खाका तैयार किया गया। यह क्षेत्र पहले टीसीपी के अधीन रहा है। इस समय नगर परिषद हमीरपुर के अधीन है। बताया जा रहा है कि यह क्षेत्र ग्रीनलैंड में भी आता है। रेरा के नियमों के तहत कालोनी बसाने से पहले सरकार से मंजूरी लेनी पड़ती है। इसके बाद कॉलोनी क्षेत्र में पेयजल स्कीम, पार्क और सड़क समेत सीवरेज की सुविधा भी मकान मालिकों को उपलब्ध करवानी पड़ती है। लेकिन हमीरपुर में सारे नियम ताक पर रखे गए।
अमर उजाला ने 6 अप्रैल, 2018 को सबसे पहले इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने नगर परिषद, आईपीएच और बिजली बोर्ड को एनओसी देने पर रोक लगाई। इसके बाद शेष बची जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया पर भी जिला प्रशासन ने रोक लगा दी। इसके साथ ही प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर की एक बेशकीमती भूखंड को भी एक कारोबारी के नाम कर दिया गया। तकनीकी विवि का यह भूखंड वन क्षेत्र में आता है। इसकी फाइल केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भेजी हुई है। उपायुक्त हमीरपुर डॉ. रिचा वर्मा ने कहा कि तहसीलदार मित्रदेव का नादौन और देहरा के तहसीलदार राजीव ठाकुर ने हमीरपुर में ज्वाइन किया है।