हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों के लिए पे-रिवीजन पर लगी दो साल की शर्त नहीं हटेगी। इस बारे में लिमिटेड डायरेक्ट रिक्रूटमेंट (एलडीआर) से भर्ती क्लर्कों का केस कैबिनेट ने लौटा दिया है।
मतलब साफ है कि पंजाब के आधार पर ये लाभ हिमाचल में कर्मचारियों को नहीं मिलेगा।
राज्य सरकार ने अक्तूबर 2012 में संशोधित ग्रेड पे कर्मचारियों को जारी किया था। यह पे-रिवीजन पंजाब सरकार द्वारा किए रि-रिवीजन के अनुसार था। इसमें कई कर्मचारी वर्गों को अच्छी वेतनवृद्धि मिली थी।
क्लर्कों को ही 5910-20200 रुपये के वेतनमान से 10300- 34800 रुपये वेतनमान देय था। राज्य सरकार ने इसे जारी करते शर्त लगा दी कि उसी कर्मचारी को यह लाभ मिलेगा, जिसे पिछले दो साल में कोई प्रमोशन न मिला हो और नियमित सेवा अवधि भी दो साल से ज्यादा हो।
इससे हजारों कर्मचारियों को नुकसान हुआ था। इसके बाद एलडीआर क्लर्कों के मामले में इसी महीने केस कैबिनेट में भेजा गया। क्लर्कोँ की मांग थी कि दो साल की शर्त को हटा दिया जाए, लेकिन कैबिनेट ने यह केस लौटा दिया है।
वित्त विभाग के विशेष सचिव केआर भारती ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी वर्गों की ओर से यह मांग उठने के बाद इस केस को कैबिनेट में भेजा गया। फाइल वापस विभाग को मिल गई है।
पंजाब ने रि-रिवाइज किया था स्केल
शिमला। हिमाचल में छठे वेतन आयोग की सिफारिशें 2006 से लागू हुई थीं। 2011 से ये देय हुईं। 2012 में पंजाब ने चुनावी साल में स्केल को रि-रिवाइज कर दिया। हिमाचल वेतनमान के मामले में पंजाब को फॉलो करता है, इसलिए हिमाचल में भी यह लागू हुआ। हालांकि सरकार ने महकमों के अनुसार अलग-अलग इसे जारी किया।
सात हजार कर्मचारी प्रभावित
शिमला। हिमाचल में दो साल की शर्त लगने के कारण करीब 7000 कर्मचारियों को रि- रिवीजन का लाभ नहीं मिल पाया। इनमें ग्रामीण विद्या उपासक से नियमित हुए टीचर, प्रमोट हुए जेबीटी, गार्ड, पटवारी, टीजीटी से लेक्चरर बने शिक्षक और एलडीआर से भर्ती क्लर्क और प्रमोटी क्लर्क शामिल हैं।