प्रदेश में पहले ही नियम के तहत निरीक्षण शुरू हो गए हैं। दवा कंपनियों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में निरीक्षण केंद्रीय एजेंसी के अधिकारी नहीं, बल्कि राज्य ड्रग विभाग की ओर से किया जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है। रिवाइज्ड शेड्यूल एम को एक जनवरी से लागू किया जाना है, लेकिन निरीक्षण कार्यवाही नवंबर में शुरू कर दी गई थी। इस कारण, अब तक 82 से अधिक उद्योगों में काम बंद हो चुका है। अगर यह नियम पूरी तरह से लागू हो जाता है तो 250 से अधिक उद्योग बंद हो सकते हैं।
उद्योगपतियों का आरोप है कि सीडीएसओ ने ऐसे नियम लागू किए हैं जिन्हें छोटे दवा उद्योग पूरा नहीं कर सकते। उद्योगपतियों ने केंद्र सरकार से इस मामले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उधर, फैडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष चिरंजीव ठाकुर ने बताया कि हिमाचल में 632 दवा उद्योग हैं, जिनमें से 225 उद्योगों का रिस्क बेस इंस्पेक्शन हो चुका है। इनमें से कुछ उद्योगों को औपचारिकताएं पूरी न कर पाने के कारण काम बंद करने का नोटिस दिया गया है। पहले तीन साल में एक बार इंस्पेक्शन होता था, लेकिन अब इसे बार-बार किया जा रहा है।