न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने माना कि वैज्ञानिक साक्ष्यों (डीएनए रिपोर्ट) और परिस्थितियों ने आरोपी युवक पर लगाए आरोपों को झूठा साबित कर दिया है, इसलिए उसे आपराधिक मुकदमे की प्रताड़ना झेलने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक युवक के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म और पाॅक्सो एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। डीएनए रिपोर्ट में साबित हुआ कि बच्चा युवक का नहीं, बल्कि पीड़िता के सगे भाई का था। न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने माना कि वैज्ञानिक साक्ष्यों (डीएनए रिपोर्ट) और परिस्थितियों ने आरोपी युवक पर लगाए आरोपों को झूठा साबित कर दिया है, इसलिए उसे आपराधिक मुकदमे की प्रताड़ना झेलने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
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गौरतलब है कि बिलासपुर जिले के महिला पुलिस थाना में वर्ष 2023 में नाबालिग लड़की (पीड़िता) के बयानों पर याचिकाकर्ता के खिलाफ केस दर्ज किया था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि नौ मार्च 2023 को युवक ने उसके घर में घुसकर उसके साथ दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पीड़िता गर्भवती हो गई और उसने एक बच्चे को जन्म दिया। पुलिस जांच के दौरान जब पीड़िता, बच्चे, और आरोपित का डीएनए सैंपल लेकर फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा तो याचिकाकर्ता का डीएनए बच्चे से मैच नहीं हुआ।
इसके बाद जब अन्य संदिग्धों के सैंपल लिए तो चौंकाने वाली बात सामने आई। पीड़िता के सगे भाई का डीएनए नवजात शिशु से 100 प्रतिशत मैच हो गया। एफएसएल रिपोर्ट ने पुष्टि की कि लड़की का भाई ही उस बच्चे का जैविक पिता है। जब डीएनए रिपोर्ट सामने आई तो पीड़िता ने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि उसके भाई ने ही उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे।