इसका उपयोग 6.8 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लेनदेन के लिए हुआ है। इसके बाद एक अन्य ठग ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम पर गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। इस मामले को रफा-दफा करने के एवज में उसने 70 लाख रुपये कमीशन लिया है। ठगी का दायरा बढ़ाते हुए कथित सीबीआई अधिकारी ने पीड़ित पर निगरानी रखने का नाटक किया और कहा कि उनकी सुरक्षा के लिए दो लोग तैनात किए गए हैं।
पीड़ित को निर्देश दिए गए कि वह हर एक-दो घंटे में अपनी कुशलता की जानकारी दें और घर से बाहर जाने या लौटने पर तुरंत अवगत कराएं। शातिरों ने बैंक खातों और मोबाइल की जांच का हवाला देकर प्रक्रिया को आसान बनाने के नाम पर सारी रकम एक विशेष खाते में ट्रांसफर करने को कहा। पीड़ित ने दबाव में आकर 12 अगस्त को 4 लाख और 20 अगस्त को 29 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से ठगों के खातों में भेज दिए।
लगातार एक महीने तक मानसिक प्रताड़ना झेलने के बाद 28 अगस्त की सुबह से ठगों के फोन और वीडियो कॉल अचानक बंद हो गए। इसके बाद पीड़ित को अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। आगामी जांच जारी है।