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हिमाचल: एक माह तक डिजिटल अरेस्ट रख सेवानिवृत्त अफसर से ठगे 33 लाख, मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी

Mon, 14 Sep 2026 09:39 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

कांगड़ा जिले की तहसील धीरा के 64 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी को साइबर ठगों ने खुद को दूरसंचार कंपनी, पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर करीब एक माह तक डिजिटल अरेस्ट रखा। शातिरों ने आधार कार्ड पर बैंक खाता खुलने और 6.8 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में इस्तेमाल होने का डर दिखाया। गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर पीड़ित से 33 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर करवा लिए गए। पढ़ें पूरी खबर...
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डिजिटल अरेस्ट। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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कांगड़ा जिले की तहसील धीरा के 64 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसने का डर दिखाकर साइबर ठगों ने एक माह तक डिजिटल अरेस्ट रखा। शातिरों ने इस दौरान खुद को दिल्ली की दूरसंचार कंपनी, पुलिस और सीबीआई का अधिकारी बताकर बुजुर्ग से 33 लाख रुपये ठग लिए। इस दौरान पीड़ित को घर से बाहर निकलने से पहले और वापस लौटने पर अपनी हर गतिविधि की सूचना देने के मजबूर किया गया। साइबर क्राइम पुलिस थाना धर्मशाला में दर्ज शिकायत के अनुसार 30 जुलाई को बुजुर्ग को एक फोन आया, जिसमें कॉल करने वाले ने दावा किया कि उनके आधार कार्ड पर आईसीआईसीआई बैंक में एक खाता खोला गया है। 

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इसका उपयोग 6.8 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लेनदेन के लिए हुआ है। इसके बाद एक अन्य ठग ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम पर गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। इस मामले को रफा-दफा करने के एवज में उसने 70 लाख रुपये कमीशन लिया है। ठगी का दायरा बढ़ाते हुए कथित सीबीआई अधिकारी ने पीड़ित पर निगरानी रखने का नाटक किया और कहा कि उनकी सुरक्षा के लिए दो लोग तैनात किए गए हैं।

पीड़ित को निर्देश दिए गए कि वह हर एक-दो घंटे में अपनी कुशलता की जानकारी दें और घर से बाहर जाने या लौटने पर तुरंत अवगत कराएं। शातिरों ने बैंक खातों और मोबाइल की जांच का हवाला देकर प्रक्रिया को आसान बनाने के नाम पर सारी रकम एक विशेष खाते में ट्रांसफर करने को कहा। पीड़ित ने दबाव में आकर 12 अगस्त को 4 लाख और 20 अगस्त को 29 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से ठगों के खातों में भेज दिए। 

लगातार एक महीने तक मानसिक प्रताड़ना झेलने के बाद 28 अगस्त की सुबह से ठगों के फोन और वीडियो कॉल अचानक बंद हो गए। इसके बाद पीड़ित को अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। आगामी जांच जारी है। 
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साइबर ठगों से ऐसे बचें
  • एसपी कुलभूषण वर्मा ने कहा कि अफसर बन फोन पर धमकाने वालों पर भरोसा न करें।
  • गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे मांगे जाने पर सतर्क रहें और किसी भी जांच के नाम पर अपनी रकम ट्रांसफर न करें।
  • ओटीपी, एटीएम पिन, बैंक खाते की पूरी जानकारी और पासवर्ड किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।
  • ठगी से जुड़े मोबाइल नंबर, बैंक खाते के विवरण, चैट संदेश, लेन-देन की रसीद सुरक्षित रखें।
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