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Iran Israel war impact: खाड़ी संघर्ष से तारकोल के दाम दोगुने, हिमाचल प्रदेश में सड़क की टारिंग पर ब्रेक

Tue, 21 Apr 2026 11:24 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो/संवाद, धर्मशाला/सोलन।

सार

ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई है। वहीं, कच्चे तेल की कमी और महंगी माल ढुलाई के कारण तारकोल की कीमतों में आग लग गई है। पढ़ें पूरी खबर...
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युद्ध का असर: तारकोल के दाम दोगुने - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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खाड़ी देशों में जारी युद्ध और तनाव का सीधा असर अब हिमाचल प्रदेश के बुनियादी ढांचे पर दिखने लगा है। ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई है। इसका खामियाजा प्रदेश के निर्माण क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा है। रिफाइनरियों को पर्याप्त कच्चा तेल न मिलने के कारण तारकोल का उत्पादन 50 फीसदी तक गिर गया है।  सड़क टारिंग प्रभावित हो रही है।

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कच्चे तेल की कमी और महंगी माल ढुलाई के कारण तारकोल की कीमतों में आग लग गई है। जो तारकोल पहले 44,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन बिक रही थी, उसकी कीमत अब बढ़कर 88,000 रुपये के करीब पहुंच गई है। रिफाइनरियों में उत्पादन आधा रह जाने से बाजार में तारकोल की भारी किल्लत हो गई है। तारकोल की आसमान छूती कीमतों ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), एनएच विंग और एनएचएआई समेत अन्य निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। 

बढ़ती लागत के कारण ठेकेदार नई परियोजनाओं के टेंडर डालने से कतरा रहे हैं। इस कारण हजारों किलोमीटर सड़क निर्माण और मरम्मत का कार्य रुक गया है। जिन ठेकेदारों ने अग्रिम भुगतान कर दिया है, उन्हें भी सामग्री नहीं मिल पा रही है। प्रदेशभर में टारिंग सीजन शुरू हो चुका है। सर्दियों के बाद अब मौसम टारिंग (सड़क पक्का करने) के लिए सबसे उपयुक्त है। 
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जुलाई-अगस्त में मानसून आने पर टारिंग की गुणवत्ता गिर जाती है, ऐसे में मौजूदा समय का सदुपयोग न हो पाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। हिमाचल की आर्थिकी की रीढ़ माने जाने वाले पर्यटन और सेब सीजन पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। सरकार ने दावा किया था कि गर्मियों में खस्ताहाल सड़कों की दशा सुधारी जाएगी, लेकिन अब इन योजनाओं पर पानी फिरता नजर आ रहा है। 

तारकोल महंगी होने से प्रदेश भर की सड़कों पर टारिंग का कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। यदि खाड़ी देशों में संघर्ष लंबा खिंचता है, तो न केवल तारकोल के दाम बढ़ने से निर्माण क्षेत्र पूरी तरह चरमरा सकता है।

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ठेकेदारों की मांग पूरी करने में लग रहे 15 दिन
हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ एनपी सिंह ने कहा कि खाड़ी देशों में संघर्ष की वजह से तारकोल की दाम दोगुना हो गए हैं। इस समस्या के बारे में प्रदेश सरकार को अवगत करवा दिया गया है। पीएमजीएसवाई की सड़कों में टारिंग की समस्या को लेकर भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय को भी अवगत करवाया गया है। लोक निर्माण विभाग सोलन के सहायक अभियंता हमिंद्र शर्मा और कंडाघाट के सहायक अभियंता हिमांशु अग्रवाल ने बताया कि कच्चे माल की अंतरराष्ट्रीय कमी के कारण तारकोल की सप्लाई बाधित हुई है। पानीपत रिफाइनरी से संपर्क साधा जा रहा है, लेकिन उत्पादन कम होने से संकट बना हुआ है। ठेकेदारों की मांग को पूरा करने के लिए 10 से 15 दिन लग रहे हैं। तारकोल के लिए गए ट्रक रिफाइनरी में खडे़ रहते हैं।
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