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हिमाचल प्रदेश: गोल्ड लेकर लौटीं बेटियों का ढोल-नगाड़ों से स्वागत; अब सरकार से नौकरी की आस

Mon, 28 Sep 2026 03:34 PM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला।

सार

कप्तान पुष्पा राणा और खिलाड़ी ज्योति ठाकुर, भावना ठाकुर का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकार स्थायी रोजगार दे, ताकि वे आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर खेल पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें। 
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'गोल्डन गर्ल्स' का धर्मशाला में भव्य स्वागत। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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एशियाई खेलों में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर लौटीं हिमाचल की कबड्डी खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री से नौकरी की मांग उठाई है। कप्तान पुष्पा राणा और खिलाड़ी ज्योति ठाकुर, भावना ठाकुर का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकार स्थायी रोजगार दे, ताकि वे आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर खेल पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें। कई खिलाड़ी अब 29 वर्ष की उम्र तक पहुंच चुकी हैं और लंबे समय से नौकरी का इंतजार कर रही हैं।

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स्वर्ण पदक जीतने के बाद धर्मशाला पहुंचीं इन खिलाड़ियों का भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में जोरदार स्वागत किया गया। युवा खिलाड़ियों और बच्चों ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका अभिनंदन किया। परिसर में आतिशबाजी हुई और ढोल-नगाड़ों, डीजे की थाप पर युवा खिलाड़ी अपनी आदर्श खिलाड़ियों के स्वागत में झूम उठे। कप्तान पुष्पा राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री से पूर्व में हुई मुलाकात के दौरान खिलाड़ियों की नौकरी की मांग पर काम करने का आश्वासन मिला था। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी लंबे समय से मेहनत कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं।


 

आसान नहीं था एशियन गेम्स तक का सफर
पुष्पा ने कहा कि एशियाई खेलों तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। पूरी टीम ने लंबे समय तक इस उपलब्धि के लिए मेहनत की। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अलग-अलग देशों के मौसम और परिस्थितियों की चुनौती रहती है, लेकिन लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के अनुभव से टीम इन परिस्थितियों से निपटना सीख गई। उन्होंने टीम की एकजुटता और कोचिंग स्टाफ के मार्गदर्शन को सफलता की बड़ी वजह बताया।

फाइनल में विश्वास नहीं डगमगाया : ज्योति
ज्योति ठाकुर ने कहा कि टीम ने फाइनल में अपना विश्वास नहीं डगमगाने दिया और पूरी क्षमता के साथ प्रदर्शन किया। उन्होंने जीत का श्रेय कोच, भारतीय कबड्डी फेडरेशन, साई स्टाफ और परिवार को दिया। उनके मुताबिक साई में बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाओं का टीम को फायदा मिला।

पहले ही एशियाई खेलों में गोल्ड गर्व का पल : भावना
भावना ठाकुर ने अपने पहले ही एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने को खुशी का पल बताया। उन्होंने कहा कि वह देश के लिए स्वर्ण जीतने के लक्ष्य के साथ गई थीं। गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना उनके लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय प्रशिक्षकों, टीम साथियों, साई, अखिल भारतीय कबड्डी महासंघ, परिवार और हिमाचल कबड्डी एसोसिएशन को दिया।
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कोच पूजा ने और निखारा पुष्पा, ज्योति और भावना का खेल
 खिलाड़ी के रूप में एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने के बाद प्रशिक्षक बनीं पूजा ठाकुर पुष्पा, भावना और ज्योति के खेल को और निखारा है। पूजा ठाकुर पिछले दो वर्षों से एनसीओई धर्मशाला में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रही हैं। तीनों ने मिलकर भारत को लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। एनसीओई धर्मशाला के लिए यह उपलब्धि इसलिए खास है कि 2022 में केंद्र की दो खिलाड़ी एशियाई खेलों की स्वर्ण विजेता टीम का हिस्सा बनी थीं। चार साल बाद 2026 में यही सिलसिला आगे बढ़ा और केंद्र की तीन खिलाड़ी भारतीय टीम तक पहुंचीं। पूजा ठाकुर की अपनी खेल यात्रा भी इस कहानी को खास बनाती है। 2014 में खिलाड़ी के रूप में एशियाई खेलों में भारत के लिए स्वर्ण जीतने के बाद अब वह प्रशिक्षक की भूमिका में हैं। ब्यूरो
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