राजीव गांधी राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेदिक संस्थान पपरोला
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प्रदेश के एकमात्र राजीव गांधी राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेदिक संस्थान पपरोला में नए शैक्षणिक सत्र से यूजी और पीजी की सीटों पर कटौती की गई है। नियमित टीचिंग फैकल्टी की कमी के चलते नेशनल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिकल साइंस (एनसीआईएमएस) ने यूजी की 10 और पीजी की 3 सीटें घटा दी हैं। सीटों में कटौती के बाद अब संस्थान में यूजी की 75 के बजाय 65 सीटें रह गई हैं। वहीं, पीजी की सीटें भी 56 से घटकर 53 हो गई हैं। इससे आयुर्वेदिक शिक्षा हासिल करने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अवसर कम हुए हैं।
नियमित फैकल्टी के पद खाली
संस्थान में सीटों की कटौती का मुख्य कारण नियमित टीचिंग फैकल्टी के पदों का खाली होना बताया जा रहा है। नियमों के अनुसार संस्थान में करीब 60 नियमित प्रोफेसर, रीडर और असिस्टेंट प्रोफेसर होना अनिवार्य है। इसके विपरीत वर्तमान में लगभग 20 पदों पर फील्ड में तैनात आयुर्वेदिक मेडिकल अफसरों यानी एएमओ को अस्थायी व्यवस्था के तहत नियुक्त कर शिक्षण कार्य चलाया जा रहा है। नियमित शिक्षकों की कमी का असर संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था और सीटों की मान्यता पर पड़ा है। इसी के चलते काउंसिल ने नए सत्र के लिए यूजी और पीजी की सीटों में कटौती की है।
विभागों में प्रतिनियुक्ति के सहारे शिक्षण व्यवस्था
पपरोला संस्थान के विभिन्न विभागों में फील्ड से एएमओ की तैनाती कर शिक्षण व्यवस्था संभाली जा रही है। वर्तमान में शल्य विभाग में तीन, शालक्य विभाग में दो, प्रसूति विभाग में एक, कायचिकित्सा विभाग में तीन और द्रव्यगुण विभाग में एक एएमओ सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा रसशास्त्र विभाग में दो, अगद तंत्र में दो, रचना शरीर में एक, पंचकर्म में एक, शरीर क्रिया में एक, मौलिक सिद्धांत में दो और रोग निदान विभाग में एक मेडिकल अफसर फील्ड से तैनात हैं।
इस तरह करीब 20 अहम पदों पर स्थायी फैकल्टी के अभाव में अस्थायी व्यवस्था के सहारे काम चलाया जा रहा है। संस्थान में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से आने वाले समय में शैक्षणिक व्यवस्था और प्रवेश क्षमता पर इसका असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।