सरकारी विभागों में संदिग्ध अफसरों की सूची अब विभागवार तैयार की जा रही है। पहले यह सूची केवल विजिलेंस ब्यूरो बनाता था।
सूची में उन अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम शामिल किए जाते हैं, जो या तो जांच के दायरे में होते हैं या फिर जिनके खिलाफ मामले दर्ज चल रहे हों।
इसके अलावा इसमें वे कर्मचारी या अफसर भी आते हैं जिनके खिलाफ किन्हीं कारणों से बार बार शिकायतें आती रही हों।
विजिलेंस ब्यूरो ने फैसला किया है कि वे अब अपने ही विभाग की ओडीआई (आफिसर्ज ऑफ डाउटफुल इंटीग्रिटी) लिस्ट तैयार करेंगे। विजिलेंस की नई सूची में फिलहाल दो ही संदिग्ध सूची में नामजद हुए हैं।
इसी क्रम में हिमाचल पुलिस ने करीब 110 लोगों के नए नामों की सूची तैयार की है। इससे पहले इस सूची में 250 से अधिक नॉन गेजेटिड ऑफिसर (एनजीओ) शामिल थे।
ओडीआई लिस्ट में नाम आने के बाद इन संदिग्ध प्रतिष्ठा वाले अधिकारियों को प्राइम पोस्ट पर तैनात नहीं किया जाता है। इसके अलावा इनकी गतिविधियों पर भी आला अधिकारियों की ओर से नजर रखी जाती है।
हल्ले के बाद हटाई थी लिस्ट
विजिलेंस ब्यूरो ने पहले सभी संदिग्ध निष्ठा वाले अधिकारियों व कर्मचारियों की सूची को वेबसाइट पर डाला था। लेकिन इस लिस्ट पर विवाद होने के कारण साइट से हटा दिया गया था। करीब तीन साल पहले इस लिस्ट को हटा दिया गया।
इसके बाद ये दोबारा नहीं बनी। यह प्रक्रिया क्यों बदली? इस बारे में पुलिस और विजिलेंस मुख्यालय में स्थिति स्पष्ट नहीं है। विजिलेंस ब्यूरो ने जुलाई 2012 में निर्णय लिया कि वे विजिलेंस को छोड़ किसी विभाग की ओडीआई लिस्ट तैयार नहीं करेंगे।
विजिलेंस ने तब से अब तक किसी भी विभाग के संदिग्ध अधिकारियों व कर्मचारियों को सूचीबद्ध नहीं किया है।
स्टेट विजिलेंस अन्य विभागों की ओडीआई लिस्ट तैयार नहीं कर रहा है। सभी विभागों को अपने स्तर पर बनानी होगी। हालांकि, इस बारे में न तो कोर्ट की ओर से और न ही सरकार की ओर से कोई नए निर्देश जारी हुए हैं।
- पृथ्वीराज, एडीजीपी, स्टेट विजिलेंस