अन्य राज्यों के मुकाबले ईमानदार छवि रखने वाली हिमाचल पुलिस भी घूसखोरों के वर्ग में शामिल हो गई है। इनमें पुरुष जांच अधिकारी ही नहीं, महिला जांच अधिकारी भी शामिल हैं।
स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने वर्ष 2012-2013 में केवल 25 ट्रैप केस बनाए। इनमें आठ पुलिस वालों को भी रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। विजिलेंस ने जिन पुलिस वालों को रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है उनमें अधिकतर इंस्पेक्टर व हेड कांस्टेबल स्तर के जांच अधिकारी शामिल हैं।
इन दो वर्षों में किसी भी बड़े अधिकारी पर विजिलेंस ने हाथ डालने से गुरेज ही किया है। विजिलेंस के अनुसार रिश्वत लेने के अधिकतर कारण संबंधित केस को कमजोर करना, रफा-दफा करना या फिर आरोपी को बचाने का आश्वासन देना शामिल है।
तीन साल पहले हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग से पुलिस की छवि को लेकर स्वतंत्र सर्वे करवाया था। सर्वे में भी कई तथ्य सामने आए थे, जिसमें पाया गया था कि प्रदेश पुलिस में भी रिश्वत लेने का चलन बढ़ रहा है।
40 हजार मांगे थे महिला इंस्पेक्टर ने
जिला मंडी की विजिलेंस टीम ने 26 जनवरी 2012 को जोगिंद्रनगर थाने की महिला प्रभारी इंस्पेक्टर श्रेष्ठा ठाकुर को 40 हजार की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
इसके अलावा मंडी विजिलेंस ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो मंडी के इंटेलिजेंस ऑफिसर अरविंद शर्मा को 1 लाख 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था, जो विजिलेंस ब्यूरो की एक बड़ी उपलब्धि रही।
पुलिस स्टेशन बद्दी में तैनात एएसआई कृष्ण चंद को 1 जून 2013 को 4 हजार, पुलिस पोस्ट सैंज के इंचार्ज मोहन लाल को 15 जून 2013 को 40 हजार, मंडी के बालीचौकी के हेड कांस्टेबल दीनानाथ को 2 हजार, ठियोग थाना में तैनात रहे एएसआई कर्म सिंह को 10 हजार रुपये की घूस लेते हुए गिरफ्तार किया था।