सांसद अनुराग ने 20 वर्ष में क्या किया, भाजपा को क्यों वोट देते हैं लोग : सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हमीरपुर में विपक्षी दल भाजपा और सांसद अनुराग सिंह ठाकुर पर निशाना साधा। नादौन में स्वास्थ्य शिविर के शुभारंभ के बाद उन्होंने किशाऊ परियोजना को लेकर कहा कि सांसद अनुराग सिंह ठाकुर को इस विषय में अपना ज्ञान बढ़ाना चाहिए। अनुराग पिछले 20 वर्षों से हमीरपुर के सांसद हैं, उन्होंने हमीरपुर की जनता के लिए क्या कार्य किया, यह बताना चाहिए। आखिर लोग भाजपा को क्यों वोट देते हैं, यह समझ से परे है। उन्होंने कहा कि भाजपा के चारों सांसद सोए हुए हैं। प्रधानमंत्री से यह पूछने की हिम्मत नहीं है कि हिमाचल को 1500 करोड़ रुपये देने की घोषणा क्यों पूरी नहीं हुई।
भाजपा नेताओं की दिल्ली में जुबान तक नहीं खुलती: सुक्खू
भाजपा नेताओं की दिल्ली में जुबान तक नहीं खुलती और हिमाचल में तोते की तरह बोलने लगते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुराग ठाकुर और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर को उत्तराखंड से पूछना चाहिए कि उनकी पीड़ा क्या है। उन्हें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की चिंताओं को करीब से समझने का अवसर मिला है। भगवान का शुक्र है कि हिमाचल में कांग्रेस की सरकार है, नहीं तो प्रदेश के लोगों पर भी उत्तराखंड की तरह आर्थिक बोझ पड़ता। हिमाचल को बिना अतिरिक्त निवेश के करीब 1500 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा, जबकि उत्तराखंड को समान आय अर्जित करने के लिए करीब 3000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
किशाऊ परियोजना के लिए दिल्ली में अकेले लड़ाई लड़ी: सीएम
परियोजना से उत्तराखंड की अधिक भूमि भी प्रभावित हो रही है। किशाऊ परियोजना के लिए उन्होंने हिमाचल की जनता के दम पर दिल्ली में अकेले लड़ाई लड़ी और उनकी मांगों के आगे केंद्र को झुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को हिमाचल की जनता को इस जीत का श्रेय देना चाहिए। अगर कांग्रेस की बजाय भाजपा की सरकार प्रदेश में होती और जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री होते तो वह इस परियोजना के लिए 5000 करोड़ रुपये देने को तैयार हो जाते।
500 करोड़ के लिए दो करोड़ की फीस अधिक नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि शानन हाइड्रो प्रोजेक्ट पंजाब सरकार के अधीन है, लेकिन जल्द ही हिमाचल सरकार इस परियोजना पर भी अपना आधिपत्य लेकर रहेगी। विपक्ष वकीलों की फीस पर भी राजनीति कर रहा है। हिमाचल के हकों की लड़ाई के लिए सरकार ने कपिल सिब्बल जैसे देश के बड़े वकील किए हैं, ताकि हिमाचल के फंसे करीब 500 करोड़ रुपये हासिल किए जा सकें।