मुख्यमंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पंचायत और नगर निकाय चुनावों के आए नतीजों को लेकर भाजपा सिर्फ सोशल मीडिया में जीती है। जमीनी स्तर पर कांग्रेस ही जीती है। भाजपा ने पहले चुनाव कारवाने को लेकर बवाल किया, लेकिन प्रदेश सरकार ने 31 मई से पहले चुनाव करवाने का लेकर शपथ पत्र सुप्रीम कोर्ट में दिया था और उसके मुताबिक चुनाव करवाए। इससे भाजपा के चुनाव न करवाने के कांग्रेस पर लगाए आरोप गलत साबित हुए। नगर निकाय और पंचायत चुनावों के नतीजों को लेकर भाजपा आम जनता को गुमराह कर रही है। जिला परिषद और शहरी निकाय चुनाव 53 जगहों में होने थे जिसमें चार नगर निगम भी शामिल थे। इनमें से चुनाव चिह्न पर भी चुनाव हुए। इसमें कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपने प्रत्याशी घोषित किए। इसमें भाजपा ने 21 स्थानों पर जीत हासिल की और तीन नगर निगमों में जीत हासिल की। वहीं कांग्रेस ने 29 शहरी निकायों में जीत हासिल की लेकिन भाजपा ने तीन नगर निगमों की जीत को सोशल मीडिया पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया।
मुख्यमंत्री ने कहा चंबा के आए परिणाम में हम दस साल बाद अध्यक्ष भी बनाया। चुवाड़ी में भी कांग्रेस जीती। भाजपा ने सोशल मीडिया पर अपनी जिला चंबा में जीत बताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर कहा कि पंचायत चुनावों में 2400 करीब प्रधान, 2300 करीब उप प्रधान कांग्रेस के जीत कर आए हैं, हमने घोषित नहीं किए। जिला परिषद में भाजपा ने अपने समर्थित सदस्य घोषित किए, उस लिस्ट को देखा तो 251 में से 100 भी नहीं आए, आजाद अधिक आए । कांग्रेस ने कोई लिस्ट जारी नहीं की। भाजपा अब आजाद को क्लेम कर रही है। सीएम ने कहा कि बीडीसी और जिला परिषद का चुनाव एक दिन का होता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा पांच गुटों में बंटी है।
बॉर्डर पर टैक्स वसूली के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अभी कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है। यह टैक्स 20 से 25 साल पहले से हिमाचल के पर्यावरण को बचाने के लिए लगाया गया था। इसके अलावा अवैध टैक्स वसूलने के मामले पर पंजाब राज्य से बातचीत की जाएगी।
भाजपा समर्थित चार जिला परिषद सदस्यों ने मुख्यमंत्री की ओर से जिला परिषद और बीडीसी प्रतिनिधियों को लेकर की गई टिप्पणी की कड़ी निंदा की है। उन्होंने मुख्यमंत्री के इस बयान को लोकतांत्रिक व्यवस्था और लाखों मतदाताओं का अपमान बताया। शिमला ग्रामीण से शिवानी ठाकुर, कांगड़ा से विजय कुमार, बिलासपुर से अशोक शर्मा और कुल्लू से अनिल राणा ने संयुक्त बयान में कहा कि सीएम ने केवल निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों मतदाताओं का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में 251 जिला परिषद सदस्य और लगभग 1800 बीडीसी सदस्य जनता के सीधे मतदान से चुनकर आए हैं। प्रत्येक प्रतिनिधि के पीछे हजारों मतदाताओं का विश्वास खड़ा है।