सिहुंता (चंबा)। उपमंडल भटियात के तहत सिहुंता पंचायत के गांव न्याहीं में पिछली बरसात के जख्म अभी नहीं भर पाए हैं। 14 परिवारों के मकान खतरे की जद में हैं। उस समय सरकार और प्रशासन ने आश्वासन तो दिया था, मगर एक साल बाद भी स्थिति नहीं बदल पाई है।
दो प्रभावितों ने अपने मकान खुद तैयार कर लिए हैं। 12 परिवार अभी भी सरकार से आर्थिक सहायता मिलने की राह ताक रहे हैं। वर्तमान में पिछली बरसात में जमीन धंसने से खतरे के जद में आए इन मकानों में ये परिवार रह रहे हैं। अब बरसात का मौसम शुरू हो गया है। डर के साए में लोग इन मकानों में अपना गुजर बसर कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार गत वर्ष बरसात के मौसम इस गांव में जमीन धंसने से करीब 14 मकान चपेट में आ गए थे। प्रशासन ने इन लोगों को कुछ समय के लिए शिफ्ट तो कर दिया था, मगर सहायता न मिलने के कारण अब वे जर्जर मकानों में रहने पर मजबूर हैं। अपनी मेहनत से मकान बनाने वाले कुंज लाल और सरदार सिंह ने बताया कि वे सरकार से सहायता राशि मिलने का इंतजार कर रहे थे। कोई सहायता नहीं मिली तो उन्होंने खुद ही मकान तैयार करने का निर्णय लिया। वे अपने नए मकानों में रह रहे हैं। सरकार से कोई सहायता राशि नहीं मिली है। इस गांव में 12 परिवार अभी भी सरकार से आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद में हैं। प्रभावित पंजू राम, भीम सिंह, जरोवर सिंह, जोगिंद्र, सुरेंद्र कुमार, करनैल सिंह, दिनेश, उत्तम चंद, विजय कुमार, काकू राम और कांशी राम ने बताया कि उनके मकान खतरे की जद में हैं। जमीन धंसने से ऐसी स्थिति बनी है। सरकार से एक साल बाद भी कोई सहायता नहीं मिली है। फिर बरसात का मौसम आ गया है। ऐसे में उन्हें हर समय अपने मकानों की चिंता लगी रहती है।
एसडीएम भटियात पारस अग्रवाल ने कहा कि प्रशासन ने सूची के आधार पर भुगतान कर दिया है। कुछ लोग रह गए हैं, उनके मकानों को नुकसान नहीं पहुंचा होगा। नुकसान के बारे में सूचना देते तो इस बारे में प्रयास किए जाते।
सिहुंता पंचायत के प्रधान अनिल शर्मा बताया कि घरों के समीप हुए भूस्खलन और जमीन धंसने के मामले को लेकर पंचायत को बजट नहीं मिला है। इस बारे में मांग की गई थी, मगर पैसा नहीं पहुंचा।