भरमौर(चंबा)। उपमंडल भरमौर के सेब उत्पादित क्षेत्रों में वूली एफिड की मार पड़ी है। इससे बागवान चिंतित हो गए हैं। बागवानी विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि वैज्ञानिक तरीके से बगीचों का प्रबंधन करें। इन दिनों बागवान बगीचों में सेब के तौलिये और कंटिग का कार्य कर रहे हैं। इसके लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण है। वहीं, लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण कई सेब के बगीचों में वूली एफिड रोग का प्रकोप भी देखा जा रहा है। भरमौर में रहने वाले 70 प्रतिशत लोग सेब का उत्पादन करके अपनी आजीविका चलाते हैं। बागवान में बलि राम पठानिया, नारायण दास, बंटी राम, रवि कुमार, जीत राम और मदन राम ने बताया कि लंबे समय से बारिश न होने के कारण फसलों को नुकसान पंहुच रहा है। सेब के पेडों पर वूली एफिड भी देखा जा रहा है।
विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ डाॅ. आशीष शर्मा ने बताया कि इन दिनों सेब के बगीचों में तौलिया आदि का काम करके खाद डालना जरूरी है। जिन बगीचों में वूली एफिड बीमारी देखी जा रही है वहां तुरंत क्लोरपाइरिफोस की स्प्रे करे। यह बीमारी सेब में इसलिए देखी जा रही है कि लंंबे समय से बारिश नहीं हुई है।
रोग लक्षण और उपाय
इस रोग यूं तो पेड़ की जड़ों में पैदा होता है लेकिन इसके बारे में तब पता चलता है जब पेड़ की टहनियों पर सफेद रूई नजर आने लगती है। इस स्थिति में बागवान के पास महज यही उपचार रहता है कि वह तुरंत क्लोरपाइरिफोस रसायन का छिड़काव पेड़ पर और उसकी जड़ों में करें। विभाग के अनुसार जिस पेड़ पर इस रोग ने हमला किया हो उस पड़े पर इस रसायन का एक लीटर पानी में 1 से 2 मिलीलीटर तक प्रयोग करें जबकि पेड़ के नीचे एक लीटर पानी में 5 से 10 मिलीलीटर रसायन मिलाकर छिड़काव करे।