चंबा। स्वदेशी सामान तैयार कर स्थानीय और बाहरी मंडियों में बेच ग्रामीण परिवेश की महिलाएं स्वावलंबी होने के अलावा अपनी मेहनत का डंका बजा सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के जरिये साबुन, अचार, आंवला कैंडी, जूट बैग, शीरा, बड़िया बना कर इन्हें स्थानीय बाजार और बाहरी जिलों के बाजारों में बेच कर आमदनी बढ़ा सकती हैं। इसमें जागोरी रूरल चैरिटेबल ट्रस्ट चंबा की ओर से इन महिलाओं का भरपूर सहयोग किया जा रहा है। इसी क्रम में जागोरी रूरल चैरिटेबल ट्रस्ट चंबा की ओर से केडी कांप्लेक्स फोल्गत में चंबा और कांगड़ा जिलों के स्वयं सहायता समूह की 30 महिलाओं को मार्केटिंग और पैकेजिंग पर दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण शिविर में जिला बिलासपुर से अभिषेक ने स्रोत व्यक्ति के रूप में भूमिका निभाई। इस दौरान महिलाओं को बिजनेस प्लान के बारे भी समझ विकसित की गई। जिसमें महिलाओं को बताया गया कि उत्पाद बनाने के लिए कच्चा माल, लेबर खर्च, मार्केट डिमांड, दुकानदारों के लिए मार्जिन मनी का भी विशेष ध्यान रखना पड़ता है ताकि उन्हें कोई नुकसान न हो सके। साथ ही उत्पादन के दौरान साफ-सफाई व स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दौरान महिलाओं को उत्पाद की कास्ट कम करने और आय बढ़ाने के लिए किचन गार्डन में रॉ-मेटेरियल उगाने को भी प्रेरित किया गया। साथ ही उनके उत्पाद को ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए ईको फ्रेंडली पैकेजिंग, लेवलिंग, स्टीकर व सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने की सलाह भी दी। उन्हें उत्पाद के लिए बाजार के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के समन्वयक के साथ मिलकर समन्वय बनाने व सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने बारे जानकारी दी गई। प्रशिक्षण शिविर में जागोरी टीम से उमा कुमारी, अभिषेक, कुलदीप कुमार व हर्षित भी उपस्थित रहे।