चंबा के साहो क्षेत्र में फूलगोभी की फसल पर बैठी सफेद तितली।संंवाद
साहो (चंबा)। विकास खंड मैहला के तहत आते लग्गा, कीड़ी, मुंगरोल, सरोल, परछा, घसीटी, हथला, चिचौह और पद्धरुई में किसानों की ओर से उगाई गई बेमौसमी सब्जी फूलगोभी की फसल को सफेद रंग की तितलियां बर्बाद कर रही हैं। किसानों को चिंता सता रही है कि यदि समय रहते वे खेतों में लहलहारही फूलगोभी की फसल को नहीं बचा पाए तो इससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। फूलगोभी की फसल को होने वाले नुकसान को देखते हुए किसान अब कृषि विभाग के वैज्ञानिकों के साथ संपर्क साध कर खेतों में स्प्रे करने में जुट गए हैं।
गौरतलब है कि जिले के अधिकांश क्षेत्रों में किसान खेतीबाड़ी कर अपने परिवारों का भरण-पोषण करते हैं। खेतीबाड़ी के जरिये उम्दा फसल की पैदावार से किसान अच्छी खासी आमदनी भी काम रहे हैं। बावजूद इसके किसानों को कभी सिंचाई सुविधा, मौसम की मार और अच्छी पैदावार न होने से भी नुकसान भी उठाना पड़ता है। बावजूद इसके किसानों की मेहनत का फल अवश्य ही उन्हें मिल रहा है। इसी क्रम में अब साहो क्षेत्र के तहत आते गांवों में किसानों ने अपने खेतों में बेमौसमी सब्जियों में फूलगोभी का उत्पादन करना शुरू किया है लेकिन वर्तमान में फूलगोभी की फसल पर सफेद रंग की तितलियों का प्रकोप बढ़ गया है। ये तितलियां फूलगोभी के पौधों पर पीले रंग के अंडे छोड़ जाती हैं। धीरे-धीरे ये अंडे कीट का रूप धारण कर लेते हैं जो बाद में फसल को बर्बाद कर रहे हैं। इससे किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। ऐसे में किसान विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं कृषि विभाग के वैज्ञानिकों से समस्या के बारे में उचित परामर्श हासिल कर अपने खेतों में स्प्रे करने के कार्य में जुट गई हैं।
किसानों भान सिंह, हुकम चंद, कांतो देवी, हेमराज, मान सिंह, धारो राम, राम सिंह, हरि सिंह, संजीव कुमार आदि ने बताया कि अचानक गर्मी का प्रकोप बढ़ने से किसानों की खेतों में सफेद रंग की तितलियों का प्रकोप बढ़ा है। इससे फसल के बर्बाद होने डर सता रहा है।
केवीके (कृषि विज्ञान केंद्र) सरू के समन्वयक एवं मुख्य वैज्ञानिक डॉ. राजीव रैणा ने बताया कि मौसम के हिसाब से सफेद रंग की तितलियों का प्रकोप बढ़ गया है। बताया कि इस प्रकोप को रोकने के लिए किसान समय-समय पर दवाइयों का छिड़काव कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि फसल पर सफेद रंग की तितलियों का कम प्रकोप होने पर क्लोरोपायरी फोर्स दवाई का छिड़काव करें और फसल पर अधिक प्रकोप होने पर डजीज नामक दवाई का छिड़काव किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि एक लीटर पानी में एक मिलीलीटर दवाई मिलाकर छिड़काव करें।