सुभाष कुमार अग्निहोत्री
चंबा। उफनते कोडला नाले को पार करना चार पंचायतों के ग्रामीणों के लिए मजबूरी के साथ जान का जोखिम भी बन गया है। नाले के ऊपर लोहे के दो एंगल पर प्लेटें डालकर तैयार किया अस्थायी पुल लोगों के लिए आवाजाही का सहारा है।
बुधवार को नाला पार करवाने के लिए रस्सी और लोहे की सीढ़ी का सहारा लेना पड़ा। हालात ऐसे हैं कि जरा सी चूक हादसे को न्योता दे सकती है। बीते मंगलवार को सुबह पहाड़ी दरकने से कोडला से अंदराड़-इंद्रुनाग-सामरा मार्ग समाका नामक स्थान पर करीब 40 मीटर तक जमींदोज हो गया।
इसके बाद सड़क पर वाहनों की आवाजाही बंद है। इससे रुहनूकोठी, जगत, क्रूंर और छतराड़ी पंचायतों के लोगों का संपर्क प्रभावित हुआ है। रोजमर्रा के काम, स्कूल, नौकरी और जरूरी सामान के लिए आने-जाने वाले लोगों को परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि समाका में पहाड़ी के नीचे निजी जलविद्युत परियोजना प्रबंधन की ओर से पावर हाउस की कटिंग, स्विचयार्ड और पावर हाउस का निर्माण किया गया है।
सामरा और औराफाटी के लिए पाइपलाइन भी बिछाई है। यह कई जगह लीक बताई जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि इन निर्माण गतिविधियों के चलते पहाड़ी कमजोर हुई और भूस्खलन से सड़क का बड़ा हिस्सा जमींदोज हो गया।
मार्ग बंद होने का असर सिर्फ सामान्य आवाजाही पर नहीं, बल्कि आपात स्थिति में भी पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार को उरेई निवासी एक व्यक्ति की मौत के बाद शव को घर पहुंचाना भी चुनौती बन गया। लोगों को सामरा होकर करीब आठ से दस किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ा। सड़क बहाल होने पर यही दूरी करीब आठ किलोमीटर रह जाएगी।
उधर, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता भान सिंह ने बताया कि मार्ग की बहाली के लिए 60 लाख का एस्टीमेट तैयार किया है। एडीएम भरमौर और उपायुक्त को भी अवगत करवाया है। मार्ग की बहाली के लिए एस्टीमेट भेजा जा रहा है। संवाद